गुरुवार, 28 मार्च 2013

मिथिला राज्य लेल ४ दिना अनशन





           मिथिला राज्य लेल ४ दिना अनशन: - युवा पीढी द्वारा (पृष्ठभूमि आ कार्यक्रम आयोजन: विस्तृत समीक्षा). अनशनकारी कवि एकान्त द्वारा ४ दिनक अनशनक फैसलाक संग मिथिला राज्यक माँग प्रति युवामें चेतना जागृतिक एक महान अवसर भेटल से सोचि जनबरी ९, २०१३ केर 'कन्नारोहट कार्यक्रम'में कार्यक्रमके भव्यतापूर्व आयोजन करबाक निर्णय लेल गेल छल। कवि एकान्तक हृदयमें अनशन प्रति जिम्मेवारी आ कार्यपथ-निर्माण संग योजनाक सुन्दर निष्कर्ष निम्नरूपे कैल गेल छल: "आन्दोलन मे ऐबाक उद्देश्य इहो रहय " मिथिला राज्य लेल संघर्ष आ संघर्ष मे लागल मैथिल आ संगठन के एका "। क्रमशः एका बनय आ से होईत प्रतीत भ रहल अईछ। एहि कार्यक्रम मे जे रहथि मैथिल रहथि। अप्पन पार्टी आ बिचारधारा स उप्पर उठी के एकटा मैथिल मात्र आर किछो नहि। आरंभिक कन्नारोहट आ अप्पन अप्पन क्वाथ के बोकर्लाक उपरांत शुद्ध भय सब मैथिल सभक बिचार रहय जे एहि आन्दोलन के एक भ'य उद्देश्य लेल लाड़ल जाई। प्रवीन भाई के बैजू बाबू सँ सेहो गप्प भेलैन, ओहो आशीर्वाद देलाह आ हुनक समर्थन सेहो भेटल (प्रवीन भाई के वार्तानुरुप आ उपश्थित अमरेन्द्र भाई के कथनानुसार )। ज्ञात हो की एहि आन्दोलन के एकटा मैथिल बनि लड़बाक निर्णय के सर्प्रथम समर्थन पूज्य धनाकर बाबू आ आदरनीय रत्नेश्वर बाबू केने रहथि आ संस्थाक रूप मे AMP के पूर्णिया ईकाई केने अछि। आन्दोलन मे अनशन के एहि अध्याय के संचालन लेल प्रवीन भाई आ दिवाकर भाई मे नीक बहस आ सार्थक बर्तालाप के परिणाम सुखद रहल जे सब अप्पन अप्पन बेदना के मुखर भ' क' रखलाह आ प्रस्ताब रहल जे: * मिथिला राज्य के निर्माण आ मिथिला मैथिली मैथिल के बिकाश के आधारभूत कारक मानि आन्दोलन के आगाँ बढेबाक आवश्यकता अईछ। * समग्र मिथिला राज्य के माँग के छोड़ी, भारत मे मिथिला राज्य के माँग के लक्ष्य कयल जाई। * आन्दोलन international border के आदर करैत नेपाल स्थित अप्पन मैथिल स्वजन के लेल संबेदना के प्रति सदैब कटिबद्ध रहय, जेना नेपाल स्थित मैथिल छथि। अस्मिताक संघर्ष दुनू दिस चलि रहल अईछ। * आन्दोलन ब्यक्ति स उप्पर उठी कय हो उद्देश्य लेल हो, मैथिल के संगठित आ एकाकार करबाक माद्दा मात्र मुद्दा मे अछि आ ताहि हेतु मुद्दा भेल नायक। समस्त आन्दोलन के स्वाभाबिक प्रतिनिधित्व मिथिला राज्य निर्माण के उद्देश्य हो। * कहब बहुत आवश्यक नहि जे आन्दोलन मे समस्त मैथिल संगठन के समर्थन देबाक लेल आग्रह करबाक बिचार भेल। * उद्देश्य के साधबाक लेल Joint Committee बनेबाक प्रस्ताब भेल। * अनशन के उपरान्त मिथिला राज्य निर्माण लेल एकटा joint memorendum देबाक बिचार भेल, से हो कोना ई बिचार के बिषय रहल। * प्रवीन भाई आन्दोलन के एहि गुटनिरपेक्ष स्वरुप के अधिक स अधिक मैथिल तक पहुँचेबाक सार्थकता पर जोर देलाह। हम एतबे कहब मिथिला आ मैथिली सब मैथिलक के छी, चाहे ओ कतुको होथि, बजैत कोनो भाषा होथि मुदा ह्रदये मैथिल होथि। मिथिला राज्य के निर्माण के एहि महायज्ञ मे अप्पन भूमिका निर्धारण पर बिचार करू, इतिहास के बनबा के प्रक्रिया मे अप्पन योगदान पर बिचार करू। समय आबी गेल जे "मूक दर्शक के भुमिका के तलांजलि दय इतिहास निर्माण मे आबी, अप्पन मैथिली बचाबी, अप्पन मिथिला बनाबी" जय मिथिला !! जय मैथिली !! जय मैथिल !!" (कवि एकान्तक विचार, जनवरी १०, २०१३ फेसबुकपर)। -------------- दिल्ली सऽ वापसी करबाक क्रममें अपन विचार जे सभक समक्ष प्रेषित केने रही जनवरी ११, २०१३ केँ: "आउ दिल्ली यात्रा के समेटी। काल्हि प्रस्थान करबाक अछि, से सभक ध्यानाकर्षण महत्त्वपूर्ण विन्दु तरफ चाहब, कृपया ध्यान दी आ सहयोग हेतु वचन दी। १. कवि एकान्त द्वारा मिथिला राज्यके माँग लेल ४ दिनक अनशन कार्यक्रम। प्रस्तावित तारीख मार्च २२-२५, २०१३। स्थान: जन्तर-मन्तर, दिल्ली। संयोजन भार: दिवाकर बाबु। २. मैथिल युवा द्वारा मिथिला राज्य लेल वृहत धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम। स्थान, तिथि उपरोक्त कार्यक्रम के समापन दिन घोषणा कैल जायत। संयोजन भार: सागर मिश्र। उपरोक्त कार्यक्रम १ लेल कवि एकान्तजी अपन जन-सम्पर्क दिल्ली लगायत समस्त मिथिलामें कय रहल छथि। जतेक संघ-संस्था आ सहयोगी मैथिल व्यक्तित्व सभ छथि तिनका सभसँ दिल्लीमें सभ जगह घूमि-घूमि सहयोग सदेह उपस्थिति लेल प्रथम द्वितीय सदाचार-विचार अनुरूप जे स्वेच्छा हो ताहि तरहें याचना कैल जा रहल छैक। सभकेँ अपन माटि-पानि-इतिहास आ पहचान लेल राज्य निर्माण जरुरी कहि सहयोग हेतु अग्रसर होयबाक निवेदन कैल जा रहल छैक। ई पहिल बेर हिम्मत देखौनिहार मिथिलाक युवा वर्ग सँ मैथिलीसेवी कवि थिकाह जिनका प्रति अपार समर्थन बनेबाक जिम्मा हमहुँ लेलहुँ, स्वेच्छा सँ। हम ई नहि देखय लगलहुँ जे एहिमें के-के छथि आ किनका-किनका सँ हमरा पटरी बैसैत अछि आ कि हमर सिद्धान्तके माननिहार छथि। हम केवल यैह देखलहुँ जे हम कि कय सकैत छी, आ कि करबाक अछि, कोना करब। आर ताहि अनुरूप आन्दोलनक प्रासंगिकता ऊपर समस्त मिथिला समाजमें विभिन्न मिडिया द्वारा एहि बात के प्रसार जे उपरोक्त कार्यक्रम जे मिथिलाक अस्मिता जोगेबाक लेल कैल जा रहल अछि ताहिमें सभक शुभकामना आ वाँछित सहयोग देल जाय। अही क्रममें जन-जन तक बात पहुँचय जे आइ धरि मिथिला लेल कि-कि भेल, कतेक सफलता-असफलता, आदि पर उल्लेखणीय चर्चा कराओल जायत आ बेसी सँ बेसी लोक के जोडल जायत। जोडय लेल किनको ५०० टाका के नोट पठाय वा गर्दैनमें गमछी बान्हि बलजोरी राजनीतिक रैला जेकाँ नहि आनल जायत, बल्कि समस्त मिथिला सँ जतेक कलाकार-रंगकर्मी-पेशाकर्मी-जातिय संगठनकर्मी आदि छथि तिनका सभकेँ आह्वान कैल जायत जे एक जोरदार प्रदर्शन लेल दिल्ली आबी आ भारत सरकारकेँ मजबूर करी जे मिथिला राज्य निर्माण लेल सोचैथ आ शीघ्रातिशीघ्र सम्बोधन करैथ। खाली भाषणमें बिहार राज्य द्वारा मिथिलाक विकासक बात बहुत भेल, मुदा असलियत एतबी जे दलाल-ठीकेदार-हाकिम-होशियार लेल छूद्र-लूट-खसोट के ललीपप आ आम जनतामें जातिवादिताके झगडाके अलावा मिथिलाके दोसर किछु नहि देल गेल एखन धरि। सुशासनके सरकार सेहो बस गपहि टा देलक, जमिनी सुधार बस खोखला प्रमाणित भेल। एकर सभक लेखा-जोखा कैल जाय आ केन्द्रके विशेष पर्यवेक्छक मिथिलाक जमिनी यात्रा करय आ उपेक्छा के हर संभव वैकल्पिक समाधान ताकय। मिथिलासँ आयल सांसद-विधायक सभकेँ ई सोचय पडत जे आखिर विकासक कोन गति मिथिला लेल चलल, राज्य वा केन्द्र सरकार के द्वारा। विकास लेल सेहो राज्यक निर्माण वांछणीय अछि। पहिल कार्यक्रमके सफलतापूर्वक पूरा भेला उपरान्त बस दोसर महत्त्वपूर्ण कदम यैह जे मैथिल युवा द्वारा धरना आ प्रदर्शन के संपूर्ण भार लैत आन्दोलन के ताबत निरन्तरता देल जाय जाबत मिथिला राज्य ससम्मानपूर्वक
बनि नहि जायत। हरि: हर:!" -----------
 यैह आन्दोलनक पृष्ठभूमिमें छल निम्न सोच: "मिथिलाक माँग केकरा लेल अवाञ्छित? हालहि २८ दिसम्बर, २०१२ ई. विराटनगर में आयोजित विद्यापति स्मृति पर्व समारोह २०६९ में आयल छलाह विशिष्ट अतिथि भू.पू. अररिया साँसद मा. सुखदेव पासवानजी, ओ दिल्ली रहैथ वा कतहु, लेकिन हर वर्ष एहि समारोह में अपन गरिमामय उपस्थिति सँ आम जनमानस के ओ दाकियानूस धारणा के झूठलाबैत छथि जे मैथिली आ मिथिला बस किछु उच्च जातिके माँग मात्र थीक। हमरा लिखैत हर्ष भऽ रहल अछि जे सम्माननीय अतिथि ओहि मंच सँ घोषणा कयलाह - बहुत जोर दैत बजलाह जे हम आइ यैह मंच सऽ घोषणा करैत छी जे बिहारके १८ जिला मिलाय मिथिला राज्य बनय। ओ किछु जिला के नाम तक लेलाह आ ताहिमें शामिल छल कटिहार, किशनगंज, अररिया, पुर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, खगडिया, समस्तीपुर.... आदि। छद्म बुद्धिके पत्रकार आ बिना पेंदी के लोटा समान कतेको चुटपुट नेता एहि आह्लाद के शायद नहि बुझि सकत, लेकिन हमरा गर्व अछि सुखदेव पासवान जी पर, गर्व अछि मेहताजी (फारबिसगंज पूर्व विधायक) पर आ गर्व अछि हर ओ गूढ रहस्य बुझनिहार बुजुर्ग अनुभवी पत्रकार आ नेतापर जे मिथिलाक सम्मान लेल हर समय तैयार रहैत छथि आ हर सतह पर आवाज उठबैत छथि। तहिना नेपाल सरकार के उप-प्रधान तथा गृहमंत्री आ उपरोक्त समारोहके प्रमुख अतिथि मिथिलाक गरिमाके प्राचिनतम् कहैत संवैधानिक सम्मान हेतु वचन देलाह आ बजलाह जे बिना मिथिलाक सम्मान देने नेपाल देशके सम्मान नहि भेटतैक। ओ खूलिके बजलाह जे मधेस एक बनेनाय बहुत कारण सँ संभव नहि छैक तऽ बारा सऽ पूब झापा धरि एक राज्य बनाउ जेकर नाम मिथिला मधेस राखू, हमरा एतराज नहि अछि। ई दू घोषणा उपरोक्त मंच सँ साधारण नहि छलैक। लोक आइ-काल्हि १७ नव नाम के पाछू जमानी-दीवानी गबैत अछि, मुदा गहिराई में जाय सोचैत नहि अछि जे केवल नामकरण कैला सऽ सीमाँचल-धर्मांचल-बूरिराजान्चल-पूर्वान्चल कयला सऽ मिथिलाक गरिमा ऊपर ग्रहण नहि लगा सकैत अछि। मिथिलाक जे महासागर भूगोल, इतिहास, भाषा, साहित्य, संस्कृति, पहचान आ हरेक सन्दर्भ जे एक राज्य हेतु गणतंत्रमें पूरा करैत अछि से स्वत: प्रमाण बनि पहाड समान ठाड्ह होइछ आ भूकयवाला अदूरदर्शी लोक के सीना तानिके कहैछ जे मिथिला के सम्मान बिना तोहर कोनो मान नहि। तदापि मिथिला अवाञ्छित अछि आ एहि सत्य सँ हम सभ पाछू नहि हँटि सकैत छी। प्रश्न उठल जे अवाञ्छित अछि... तऽ केकरा लेल? आउ मंथन करी! १. जनसाधारण जनमानस: जे आइ धरि बोनि - मजदूरी करैत रोजी कमेलक, ओकरा लेल धैन सन! ओकरा तऽ लालटेन धरा दियौक आ ईशारा कय दियौक... बुझि गेलहक न... यैह छाप थिकैक। केओ दोसर दिस सऽ आयत आ गाँधीजी छाप मैन्जनके हाथमें दैत कहत जे बस एहि बेर प्रभाकर बाबु के पार लगा देबैन, छह महीना के जोगार बखारी सऽ उठा लेब। मैन्जन तैयार तऽ सभ तैयार। ओकरा लग राज्य के कि माने छैक आ कि पहचान के महत्त्व ताहि सभ सऽ सरोकार कि? तखन प्रयासो किछु नहि भेलैक अछि केकरो द्वारा जे राज्य किऐक आ तेकर सार्थक प्रभाव कोना से मानय पडत। १३३-१३४ बेर यात्रा प्रवीण केलक लेकिन ध्यान सभ दिन ओहि बकथोंथी करयवाला टा पर रहलैक। आबो यदि नजैर खुलल छैक तऽ आगू जाय किछु करय, बस! बुझबय ओहि मिथिलाक गणकेँ जे विदेह राजा जे सम्पन्नता, ऐश्वर्य, रिद्धि आ सिद्धिके संग समस्त मिथिला भूमिके शुद्ध-शिक्त रखलाह जे केरो के पात पर देवता के इहा-गच्छ - इहि-अतिष्ठ कहलापर दौडल आबय पडैत छन्हि से फेरो होयत आ अहीं सभक प्रत्यक्छ सहभागिता सँ पूर्ण समावेशी आ प्रदेश-विकास सरकार बनत जे बस मिथिले लेल सोचत। आइ धरि जे ६० वरख अहिना बहलाबैत-फुसियाबैत बिता देलक स्वतंत्र भारतमें से मिथिला बनेनहिये कल्याणक मार्ग प्रशस्त होयत। जे शिक्छा हिन्दी आ अंग्रेजीमें देबाक चलते सभक धियापुता पढाइ करबा सऽ वञ्चित रहि जाइत अछि से मातृभाषा मैथिलीमें पढेलापर सभ आराम सऽ साक्छर बनत। मजदूरी करबाक लेल दिल्ली-मुंबई नहि जाय अपन राज्यमें रोजगार भेटत। अपन खेत के पटाबय लेल उधारके दमकल नहि अलग-अलग नदी सँ चिरल अपनहि नहर होयत। पानिक कमी थोरेक न अछि, बस बेईमान व्यवस्थापन आ जाहि नामपर बिहारी नेता लूट-खसोट मचबैत अछि तेकरा नियंत्रण करबा सऽ काज होयत। आ मनमें शंका जे ब्राह्मण बडका जातिक लोक सभ ऊपर बैसि लूटत तेकर प्रतिकार बहुल्यजन कोना करैत छैक से आब ककरो सऽ छूपल नहि अछि। अत: अपन राज्य अपनहि अधिकारवाली सूत्रपर सभके जुडैत काज करबा लेल मिथिला राज्य निर्माण करू। २. मैथिली बिसरल लोक: अफसोस जे मैथिली ऊपर ततेक रास डांग मारल गेलैक, अपनो आ सहजहि बहरियो द्वारा जे रोजीके भाषा पूर्णरूपेण मैथिली नहि बनि सकल आ स्वत: लोक मैथिली बिसरय लागल। आब जे मैथिली बिसरि गेलाह तिनका लेल मिथिला राज्य के प्रासंगिकता पुन: एक उच्च बुझनुक तवका मात्र लेल बाँचल, बाकी सभ जहिना-तहिनामें खुश छथि। कोनो आत्मसम्मानके भूख नहि, जखन मैथिली बिसरा गेल, दोसर भाषा अपना लेलहुँ तऽ आब मिथिला हो, बज्जिकाँचल हो, अंग प्रदेश हो, सीमांचल हो, कोसी प्रदेश हो, झारखंड हो, दियारा प्रदेश हो या जे भी हो - सभ सऽ उत्तम बिहारहि में रहब। खूब जाति-जाति भोकरब आ कहियो लालटेन जरायब तऽ कहियो तीरे मारब, कमल तऽ फूलाइ सऽ रहल आ हाथ तऽ कहिया नऽ कटि गेल जे मिल बन्द भेने पार। अहू दिस ध्यान कि देबय पडतैक जे मैथिली भाषा हो या मैथिली के भाषिका, सभके मिथिलाक पूर्ण भाषा मानि बस ऐतिहासिक पहचान प्रति सम्मान लेल जोडय के काज करैत मिथिला निर्माण लेल एकजूट करय पडतैक। संगठन एक बेर तऽ नेताजीके डायरीमें बनैत छैक लेकिन पुन: संगठनात्मक कार्य कि करी, प्रगति कि भेल, कतेक दिन प्रखंड पर धरना भेल, कतेक गरीब के राशन उपलब्ध करबाओल गेल, कतेक विकासक काजके लेखा-जोखा लेल गेल.... सभ नदारद! आ जे स्थापित राष्ट्रीय पार्टी सभ छैक तेकरा तऽ कोन योजना अन्तर्गत कतेक पाइ निर्गत भेल आ लूटय लेल के सभ छें ताहि सऽ फूर्सते नहि, भाँडमें गेल मिथिला या बिहार या भारत या पहचान या आत्मसम्मान! ३. बिहार सरकार के कर्मचारी: मलफाइ उडबय लेल मोट तनख्वाह भेटिते यऽ आ हमरा कोन लेना-देना है ई आन्दोलन-फान्दोलन से! होत तब अच्छा है, ना होत तबो अच्छे है। एहि वर्गके जोडबाक लेल आर्थिक भार दैत आन्दोलन करय के आवश्यकता, जाबत ई वर्ग चाप महसूस नहि करतैक तऽ आन्दोलन नहि सफल होयत आ सभ दिन खाली आली-हौसे चलैत रहत। ओना कोनो कार्य लेल बुद्धिजीवी प्रकोष्ठके निर्देशन जरुरी! ४. कलेजिया विद्यार्थी: 'यार! हमरे सेन्टर पर तऽ खूब चोरी हुवा, तोरा सेन्टरपर केना हुवा?' यैह अर-दर बहस चलैत छैक कारण नागेन्दर बाबु के समय सऽ जे रोग लगायल गेल चोरी सेन्टर के तेकर दुष्परिणाम आइ धरि भोगि रहल अछि विद्यार्थी वर्ग। आदर्शता गायब छैक। धोइधफूल्ला मास्टर सब पढेतैक कि कपार बस गप लडबैत छैक, नोट लिखबैत छेक, खूब घोंकबैत छैक, पास करबैत छैक। ओ विद्यार्थी भला कि बुझय गेलैक आत्मसम्मान-संस्कृति-पहचान? तऽ झंडा धराय कार्यकर्ता एकरहि सभके बनाबय पडतैक। स्वत: धीरे-धीरे जानकारी बढैत जेतैक। काजो प्रबलताके संग आगू बढतैक। ५. मैथिलानी: 'चुल्हा फूकय सऽ फुर्सत भेटय बौआ तऽ अहाँके आन्दोलनमें आबी?....' 'धू जाउ! हुनका एहि सभ सऽ घृणा छन्हि।......' 'अहाँ सभ हमरा सभके पूछबो करैत छी?....' ईत्यादि! बस बाजिके खानापुर्ति! बाकी किछु नहि। केओ लाजे परेती तऽ केओ कुनु बहन्ने! संगठन विशुद्ध हिनकहि सभके हो आ किछु काज लेल संपूर्ण जिम्मेवारी हिनकहि सभके देल जाय तऽ सुधारक गुंजाईश छैक। बाकी हम अनुभवहीन छी एहि मामले! अपने घरवाली नहि टेरती तऽ दोसर के के पूछैत अछि। ;) एहिमें बहुत रास विन्दुपर सोचब हमरा लेल समयाभावमें नहि भऽ पायल, यदि संभव हो तऽ किछु महत्त्वपूर्ण विन्दु जरुर जोडी! हरि: हर:!" तदोपरान्त जेना सामान्यतया मैथिल द्वारा घोषित हरेक कार्यक्रममें होइत छैक जे गूट-निरपेक्ष मानितो खूब गूटबाजी आ वैमनस्यता पसारबाक नांगट खेल, किछु तहिना सकारात्मक सोच संग नियोजित एहि कार्यक्रममें भेलैक आ संवादविहीनताक कारण, एक-दोसराक पीठ पाछू कूचेष्टापूर्ण निन्दाक खेल सँ सशक्त आन्दोलनके जगह निरीह आ कामचलाउ आन्दोलन सेहो कठोर प्रतिबद्धता आ सात्त्विकताक संग २२-२५ मार्च, २०१३ केर ४ दिना अनशन अपार सफलतापूर्वक इतिहास रचैत पूरा भेल। मिथिला निर्माण में एहि आन्दोलनक भूमिका युवावर्गमें मिथिला-राज्यक माँग प्रति सचेतना जाग्रत केलक। उतार-चढाव सेहो भेल कारण हमर बात सऽ केकरो टीस आ केकरो बात-व्यवहार सऽ हमरा टीस उठब मैथिलक पुरान पहचान थीक। लेकिन जे मूल उद्देश्य छलैक से पूरा भेलैक। एक कवि सऽ अनशनकारी तीन मिथिलाक धरतीपुत्र बनि गेलाह - नमन कौशल कुमार व मनोज झा केँ जे स्वस्फुर्त आ बिना केकरो कोनो उकसाहटक एहि पवित्र आन्दोलनकेँ चारि चाँद लगा देलाह। कवि एकान्तकेँ मना केला के बावजूदो अनशनक प्रारूपपर असगर ठाड्ह राखब आ बहुत अन्तिम क्षणमें ई स्पष्ट करब जे समन्वय समिति या कार्यक्रम आयोजन हेतु एक संयुक्त कार्यदल नहि बनल, कोष निर्माण नहि भेल, के सब औता तय नहि भेल, ज्ञापन पत्र कोना बनत, कि बनत... किछु स्पष्ट नहि भेल... मिडिया सहयोग, भारत सरकारसँ वार्ता करबाक लेल प्रतिनिधि मंडल.... सभ बात लेल कोनो पूर्व योजना नहि तैयार भेल.... एतेक तक कि मंच केना बनत, साउण्ड सिस्टम, उपस्थिति पुस्तिका.... कोनो पूर्वाधार के किछुओ इन्तजाम नहि भेल... ई समस्त बात मानू जे अपने आप में कतेक भयंकर डरावनापूर्ण आ लज्जास्पद छैक... तखन दोष केकरो नहि बस अनुभवहीनता मात्र हावी बनल। अनुभवहीनता तऽ सोझाँ देखायवाला वस्तु थीक, मूल में कारक किछु आर रहल जे कोनो सार्वजनिक स्थलपर रखला सऽ हमरा सभक नुकसान अछि, बस ई बुझू जे मैथिलक आपसी मेलमें व्यक्तिगत स्वार्थक भयानक मारि अछि आ दुष्परिणाम जे गूटबाजी नहि छूटि रहल अछि। लेकिन अपन थोर-बहुत अनुभव सँ कहयमें संकोच नहि भऽ रहल अछि जे 'महादेव सर्वोपरि छथि' आ कोनो हृदय सँ विचारल कार्य पूरा करबाक लेल आइ धरि ओ स्वयं ठाड्ह होइत रहलाह छथि, ठीक तहिना कवि एकान्त पूर्व-संध्यापर विचारल योजना तहत बस माँ काली के शरणापन्न होइत अनशन स्थलपर विदा भेलाह आ बाकी अपनहि महादेव त्रिशूल नचबैत सभ कार्य अपराह्न होइत-होइत डोरिया देलखिन। दुनियामें ढिंढोरा पीटनिहार भले किछु बाजि एहि आन्दोलनक मर्मके तुच्छता आ छूद्र नाम लेल झाइल बजबैथ, मुदा काजक रहल केवल बाबा बैद्यनाथक कृपा! :) बस शरणागत भक्त लेल ओ स्वयं सेहो साक्षात् माँ पार्वती (काली) केर कृपा संग ४ दिनक अनशन मानू ४० मिनटमें तय कय देलनि। एक सऽ एक विचार कयलनि, क्रान्तिक बिगूल बाजल, नवपथ सोझाँ आयल आ आब जल्दिये निरंतरताक क्रम बनत। मिथिलाक धरतीपर - भारतक राजधानीमें - दुनू जगह तऽ कम से कम मैथिल प्रण कय लेलाह जे अपन सुसुप्त शक्तिकेँ जगायब। उपरोक्त अनशन मानू जे जाम्बवन्तजी समान हरेक सुच्चा मैथिलमें हनुमानजीक शक्तिके आभान करौलक। आब जल्दिये नव-नव घोषणा सँ पुरान संस्थाक संग नवयुवा डेग बढबैत चलताह से हमरा विश्वास अछि।

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बुधवार, 20 मार्च 2013

की छलोउ हो बाऊ की भेलोउ हो बाऊ

प्रकाश भाई जी आ जितमोहन भाई जी में बहुत घनिष्ट मित्रता छलैन ..

जितमोहन भाई जी गाँव में सोनार के काज करे छलाह हुनका लग जेभी ग्राहक आबे छलखिन सब के ओ ठइक लाई छलखिन खास कs महिला मंडली के बेशी एक दिन प्रकाश भाई जी के कनिया (लाजवंती भौजी ) अपन पायल ल के सेहो गेली जितमोहन भाई जी लग कहलखिन जे योउ बुआ कानी हमर पायल के साफ काय दिया जितमोहन भाई जी कहलखिन जे हा हा दिया ने जरुर लाजवंती भौजी पूछल खिन जे लेबय लाल कखन आयब हम जितमोहन भाई जी साँझ में भौजी साँझ में आबि काय ल गेली किछु दिन पहिरली ओकरा बाद ओ निक जनका करी भय गेली बहुत गोटा के देखलखिन सब कहेन जे इ तय अनुमुनियम के अच्छी ये कनिया इ बात प्रकाश भाई जी के पत्ता चलल ओ क्रोधित भय गेल आ ओहिठाम निश्चित केला जे हम जितमोहन जी सय बदला जरुर लेब पर कs की सके छैथ परम मित्र जे छथिन ..
इ प्रक्रिया बहुत दिन तक चलल कुछु दिन बाद प्रकाश भाई जी कहल खिन जितमोहन भाई जी सs मित्र आह के बेटा गलटुआ बहुत बदमास भय गेल आ पढाई पर सेहो नय ध्यान दय रहल अछि तय एकरा कतोउ हॉस्टल में दय दियो इ गप सुनी जितमोहन भाई जी के चेहरा पर प्रसंता देखे वाला छल ओ कहलखिन प्रकाश भाई जी सs मित्र आहु तय सहरे में रहे छि किया ने आह्पने संगे रखिये एकरा और जे खार्चा लगते से हम देब इ गप सुनी के प्रकाश भाई जी से मुस्कुरेला आ सोचला जे आब तय हमर पिलोग्राम बनल जा रहल अछि प्रकश भाई जी हा हा मित्र किया ने हम जरुर लय जायब आह एकरा कलिए तैयार के दियो आ गलटुआ मई सs सेहो पूछी लियो जितमोहन भाई जी कोनो बात नय छाई आह संगे जय लेल हम एकरा, एकरा की एकरा मयो के तैयार काय देब प्रकाश भाई जी किया योउ हुनको पधेबक अछि की जितमोहन भाई जी धुर कहां बात करे छि मित्र आब ओ पढाई वाली ने छैथ बिगरी गेल छैथ खैर जय दियो आह खली हमरा गलटुआ के पढ़ा दिया .. प्रात भेने गलटुआ तैयार भय के प्रकाश भाई जी संगे जय लेल उगुतायल छल सहर पहुच कs प्रकश भाई जी एक टा बन्दर खरीदला आ ओकरा खली सिखाब्थिन जे बन्दर कही जे "की छलोउ हो बाऊ की भेलोउ हो बाऊ " इ बात ओकरा करीबन 8 महिना तक सिखेलखिंन आ गलटुआ के एक टा निक विद्यालय में पढे लेल दय देलखिन 8 महिना बाद प्रकश भाई जी बन्दर के लय के गाव गेल आ बन्दर के जितमोहन भाई जी के घर में दय देलखिन आ कहल खिन जे जितमोहन भाई जी सय जे दोस्त आह के बेटा पढिते-2 बन्दर भय गेल जखन बन्दर सय किछु बात करथिन तय बन्दर कहे की छलोउ हो बाऊ की भेलोउ हो बाऊ इ सुनी जितमोहन भाई जी आ सोनपरी भोउ जी के हालत ख़राब भय गेल फेर पूछल खिन भाई दोस्त इ कोन भेल फेर प्रकश भाई जी सेम जवाब देलखिन जे गलटुआ पडिते-2 बन्दर भय गेल किछु देर बाद सोनपरी भौजी सेहो पूछल खिन जे प्रकश बोउअ एहनो कहु भेलेया जे इंसान सs बन्दर भय जेते तय पर प्रकश भाई जी जवाब देलखिन जे भौजी जखन चाँदी अनमुनियम भय सके छाय तय इंसान बन्दर किया ने , इ बात जितमोहन भाई जी के दिमाग में घुसलैन तखने ओ कहलखिन जे भाई हम बुझी गेलोउ आह सब ता पुरना बदला लेलोउ है हम लाजवती भौजी के पायल वापस का्य डेय छियें आह हमरा बेटा आ एक टा गप और जे आई के बाद हम एहन काज कहियो नय करब प्रकाश भाई जी मुस्कुरा का्य कहलखिन भाई बहुत निक बात जे आह के आखि खुली गेल ...
"की छलोउ हो बाऊ की भेलोउ हो बाऊ " "की छलोउ हो बाऊ की भेलोउ हो बाऊ " "की छलोउ हो बाऊ की भेलोउ हो बाऊ "
चन्दन झा "राधे"

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मंगलवार, 12 मार्च 2013

मिथिलाक गामघर: स्वागतक योग्य अछि यूपीएससी केर नव नियम

मिथिलाक गामघर: स्वागतक योग्य अछि यूपीएससी केर नव नियम:  स्वागतक योग्य अछि यूपीएससी केर नव नियम  यूपीएससी केर नियममे कएल गेल परिवर्तनक हम सर्मथन करै छी। कारण जँ हमरा लोकनि अपन-अपन मातृभाषाक उन...

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रविवार, 10 मार्च 2013

मिथिलाक गामघर: 79म सगर राति दीप जरय भेल सम्पन्न

मिथिलाक गामघर: 79म सगर राति दीप जरय भेल सम्पन्न:   79म सगर राति दीप जरय भेल सम्पन्न दरभंगा: दरभंगा जिलाक घनश्यापुर गाममे रविकेँ 79 सगर राति दीप जरय कथा गोष्ठिक आयोजन भेल। कमलेश झाक संयो...

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बुधवार, 6 मार्च 2013

मिथिलाक गामघर: NAPUNSAK GAZENDRA THAKUR KER KUKRITY DEKHAL JAAU ....

मिथिलाक गामघर: NAPUNSAK GAZENDRA THAKUR KER KUKRITY DEKHAL JAAU ....: Gajendra Thakur साहित्य अकादेमी द्वारा युवा पुरस्कारक भेल घोषणा। हिन्दीमे लिखैबला द्वारा मैथिलीमे मात्र पुरस्कार लेल लिखल जेबाक प्रवृत्ति, ...

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मिथिलाक गामघर: DEKHU ASHISH ANCHINHAARAK PAAGALPAN . HINDI VIRODH...

मिथिलाक गामघर: DEKHU ASHISH ANCHINHAARAK PAAGALPAN . HINDI VIRODH...: Ashish Anchinhar साल 2012 के लिए मैथिलीमे युवा पुरस्कार पाने वाले अरूणाभ सौरभ को बधाइ... मगर जब जगदीश प्रसाद मंडल जी को टैगोर सम्मान मिला थ...

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अक्सर पूछल जायवाला प्रश्न आ उत्तर

प्रिय द.मु.मि.के आगन्तुक!
हम सभ अनुभव कयलहुँ अछि जे दहेज मुक्त मिथिला अपन स्थापना मार्च ३, २०११ सँ एखन धरिक अत्यन्त कम अवधिमें एक अन्तर्राष्ट्रीय समूह बनि गेल अछि; शनैः शनैः समयक माँग अनुरूप बहुत रास सुधार सेहो लाओल गेल अछि जाहिसँ सहभागीजनकेँ सुविधा हो। पहिले ई पूर्णतः मैथिल हेतु मात्र समर्पित छल, कालान्तरमें एतय अन्यके सहभागिता देखैत हम सभ हिन्दी आ अन्य भाषाके सेहो मिथिलाक भाषा मैथिलीके अतिरिक्त मान्यता देलहुँ।
आब देखयमें आबि रहल अछि जे आगन्तुक एहि समूहके बारे आ एकर प्रतिबद्धता के बारे जानकारी रखबाक लेल बेसी रुचि लऽ रहल छथि। अतः आजुक आवश्यकता एक ‘अक्सर पूछऽ जायवाला प्रश्न आ उत्तर’ के अछि जाहिसँ सभक जिज्ञासा के पूर्ण समाधान हो, एतय तक जे सदस्यगण पहिले सऽ सहभागी बनल छथि हुनकहु जानकारी के अभाव देखल जाइछ, अतः ई कदम हुनकहु लेल हितकारी बनत।
एखन एकरा अहिना छोड़ल जा रहल अछि बिना कोनो प्रश्नक - अपने अपन तरहें प्रश्न निर्माण कय सकी। या, यस्वतः संज्ञान सऽ सामान्यतया पूछल जायवाला प्रश्न हम सभ स्वयं रखैत अपने लोकनिक जानकारी लेल सभ बात राखब।
हरिः हरः!
प्र. १. दहेज मुक्त मिथिला के परिचय संछिप्तमें?
उ. एक जागृति अभियान! युवा के जागरण हेतु दहेज प्रथा के बढैत प्रकोप पर चर्चा के प्रोत्साहन! दहेज नहि लेब, नहि देब... धिया-पुता में सेहो नहि लेब-देब आ ने एहेन कोनो विवाह में सहभागी बनब जतय लेन-देन भेल हो।
प्र. २. दहेज के परिभाषा?
उ. सब किछु पसिन पड़ल, विवाह लेल तैयार छी... मुदा स्वेच्छाचार के विरुद्ध एक-दोसर पर माँग थोपैत छी। माँग कैल कोनो वस्तुके दहेज कहल जैछ। विवाह के पूर्व-शर्तमें एहेन माँग के मात्र दहेज कहल जाइछ जे सामान्य आवश्यक माँग - जेना नीक घर-वर, नीक बोल-वचन, नीक पढल-लिखल, नीक खानदान, सुन्दर आदर्श... ई सभ माँग मानवता के पोषक माँग थीक, एकरा दहेज नहि कहल जा सकैत छैक। ई सभ भावना के माँग भेल जे हर प्राणीमें नीक प्रति आकर्षण रखैछ। वस्तुतः माँग ओ भेल जे हमर बेटी लेल हमरा चान चाही, हमरा २ गो तारा आ वृहस्पति समान गन्धर्व-राजकुमार चाही... ओम्हर जे हमरा अलखचान स्वर्गक परी पुतोहु चाही, ग्रेजुएट आ विदुषी विद्योतमा चाही.. से सभ चाही आ चाह के युद्ध में अन्त के माँग जे मुद्रा एतेक चाही... बरियाती के स्वागत एना चाही... विवाह शहरे में हो... होटल में बरियाती के ठहराव हो... आ अनेको तरहक माँग जे वास्तवमें सामनेवाला के स्वेच्छा सऽ आ क्षमता सऽ बहुत दूर के वा कर्जा करय लेल बाध्यकर हो। एहेन माँग के हम सभ दहेज मानी। अर्थात माँगरूपी द्रव्य वा वस्तु वा थोपुआ भावना के हम सभ दहेज मानी। ओ दहेज नहि भेल जे दुनू पक्ष मनमर्जी सँ अपन सन्तानके विवाह उपलक्ष्य लेन-देन करय लेल तैयार छथि, करैत छथि वा करबाक इच्छा रखैत छथि।
प्र.३ दहेजक विरोध किया? 
उ. दहेजक विरोध के मूल कारण जे आइ के विकसित युग में हमर समाज में अखनो बेटा आ बेटी में असमानता मानल जा रहल अछि। बेटा अगर शिक्षित आ रोजगार सँ जुरल अछि तऽ पुतोहु चाही गुणी, शिक्षित, खानदानी आ तेकर संग दहेज़ के मोट रकम आ साज-समान आधुनिक युग मुताबिक। भले बेटा डॉ. अईछ आ पुतहु सेहो डॉ. तैयो बेटा बाला लेबे करता। एकटा गरीब बाप के बेटी जे सर्वगुण संपन्न अछि, मुदा पिता के पास पाई नहि छैन तांइ ओकरा मजबूरन बेमेल वियाह के लेल बाध्य होबय परैत छैक। लोक दहेज़ के प्रतिष्ठा सऽ जोरने जा रहल छैथ। फलाँ के बेटा के एतेक देलकैक तऽ हमर बेटा कि ओकरा सऽ कम अछि? ई प्रश्न दिन ब दिन एहि दहेज़ रूपी दानव के काया बढा रहल अछि। साधारण लोक आजुक एहि आर्थिक संकट के समय में अपन निर्वहन करय में असमर्थ भऽ रहल अछि, तइ पर ई दहेजक चिंता बहुतो के जीवन के सुख-चैन के बरबाद केने अछि। आब समय आइब गेल जे समाज के सब वर्ग एहि विकराल समस्या पर चिंतन करी.   
प्र.४ दहेज अभिशाप कोना?
उ. दहेज के शुद्ध स्वरूप तऽ परंपरा सँ केवल आशीर्वाद आ स्वेच्छाके प्रतीक रहल, मुदा कालान्तर में लोभ, लालच आ सौदागरी के कारण आब ई माँगरूप में परिणत भऽ गेल अछि। एकर दूरगामी प्रभाव एतेक खतरनाक जे लोक बेटी पैदा तक करय में डेराइत छथि, आधुनिक विज्ञानक विध्वंसक गति सँ कोइखमें बेटीके भ्रूण केर हत्या होवय लागल अछि। एकर दोसर दुष्प्रभाव ई जे लोक सस्ता-सुभिस्ता निबटय के चक्करमें बेटीके समुचित पढाइ सँ सेहो वंचित रखैत छथि। बेटी जातिकेँ समाजिक दुत्कार के कारण मनोबल गिरल जा रहल छैक आ लिंगभेदके सभ दुष्प्रभाव सऽ समाज पिछड़ल जा रहल अछि। समाजिक सौहार्द्र आ समग्र विकास के जगह विध्वंसक विचारधारा आ अनाचार-कदाचार बढल जा रहल अछि। कतेको बेटी उपेक्षित रहलाके कारण आत्महत्या सनक कलंकी कदम तक उठा लैछ। कतेको गरीबके बेटी अपन देह के बाजार में निलाम तक करय लगैछ। हर तरहें दहेज के चलते विकास ठमैक गेल अछि आ नित्य हिंसा-अत्याचार के चलते समाजक एक सशक्त अंग नारी अवहेलना के शिकार बनि रहल छथि। एकर बुराई तऽ हम किछु मात्र गना सकल होयब, एकर बर्बरता के सीमा नहि छैक जेना बुझा रहल अछि।
प्र.५ दहेज मुक्त मिथिला कि दहेज मुक्त विवाह लेल आवश्यक कार्य करैत छैक?
नहि! विवाह नितान्त व्यक्तिगत विचार आ रुचिके बात थीक। एहिमें भला कोनो संस्था कोना के प्रयस करतैक! बस, ई एक मुहिम थीक जे दहेज मुक्त विवाह लेल सभ सँ अपील करत। दहेज मुक्त विवाह करनिहार के सम्मान देत। दहेज के बुराई सभ के लोकक समक्ष राखत। आजुक नव पीढी के संग चर्चा करत जे आखिर कोनो परंपरा के रूप यदि बिगैड़ जाइत छैक तखन बोझ कतेक दिन तऽ उठायल जाय! दहेज के स्वच्छ परंपरा आब मरल लाश जेकाँ वातावरण प्रदूषित केने जा रहल छैक। एहि सँ महामारी पसैर रहल छैक। एहि लाश के संस्कार करब जरुरी छैक नहि कि एकरा लऽ के राजनीति वा समाजिक सम्मानके प्रतीक ठाड़्ह करब! एहि लेल आजुक पीढी जागैथ आ अपन बड़-बुजुर्गके बुझाबैथ। बस यैह सभ तरहक जागृति पसारबाक अभियानके नाम थीक दहेज मुक्त मिथिला। जी! यदि युवा एकत्र होइत छथि तऽ स्वयंसेवाके तर्ज पर किछु कार्य जरुर करैथ। जेना महत्त्वपूर्ण परंपरा के संरक्षण! एहि में वर्तमान समय सौराठ सभा के शुद्ध स्वरूप के संरक्षण लेल प्रयास करैत छैक। देश-विदेश पसरल समस्त मैथिल आइ इहो समस्या सऽ जूझि रहल छथि, अत: एहि लेल एवं मिथिलाक सम-सामयिक समस्या पर सामूहिक चर्चा लेल सेहो एक सांस्कृतिक पर्यटन केन्द्रके रूपमें लोकवर्गकें जमा होयब जरुरी।

द्वारा, प्रवीन नारायण चौधरी

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मंगलवार, 5 मार्च 2013

दहेज मुक्त मिथिलाक सफलतम २ वर्ष पूरा



दहेज मुक्त मिथिलाक सफलतम २ वर्ष पूरा


दहेज मुक्त मिथिला: तेसर वर्षमें प्रवेश(विशेष प्रतिवेदन)
  
दहेज मुक्त मिथिला आइ ३ मार्च २०१३ तेसर वर्षमें प्रवेश पौलक - विगत दू वर्षमें उपलब्धि सामान्य सऽ सेहो निचां रहल जेना हमर अनुभूति कहि रहल अछि। असफलता-सफलताक द्वंद्वमें फँसबाक लेल नहि, लेकिन आत्मनिरिक्छण लेल ई जरुरी जे दुनू विन्दुपर समीक्छा जरुर कैल जाय।

सफलता आ असफलताक सूची:सफलता १. सौराठ सभागाछी पुन: उत्थान हो ताहि लेल सार्थक सहकार्य। २०११ व २०१२ दुनू वर्ष।
  
असफलता १. बहुतो युवा द्वारा गछलाके बादो सभामें नहि आबि चोरा-नुका के विवाह करब घोर असफलता आ शायद आरोपके सिद्ध करयवाला जे कहयकाल मात्र दहेजके परित्याग लेल शपथ लेल गेल लेकिन विवाह घडी चोरा-नुका कार्य करब याने अवश्य किछु संदेहास्पद व्यवहार तरफ इशारा करैत अछि।
  
सफलता २. दहेज मुक्त मिथिला लेल पूर्ण प्रजातांत्रिक चुनाव अनलाइन सभा द्वारा करैत एक कार्यकारिणीक गठन।
  
असफलता २. मैथिलक आम स्वभाव जे आपसमें मेलके कमी, व्यक्तिवादी बनैत मुद्दाके दरकिनार करैत केवल आपसमें घमर्थनबाजी करब तेकर खुलेआम प्रदर्शन आ विभिन्न बहाने पलायनवादी मानसिकताक प्रदर्शन। एकजूटतामें कमी, अभियानक गतिमें शिथिलता।
  
सफलता ३. दहेज मुक्त मिथिला लेल वेबसाइटके निर्माण, फीचर व फेसिलिटी पर सुन्दर समझदारीक संग कार्य संचालन सँ एक कीर्तिमान स्थापित कैल गेल।
  
असफलता ३. उपरोक्त वेबसाइट के समय-समयपर स्थिति-परिस्थिति अनुरूप बदलैत आम जन लेल उपयोगी बनेबाक छल, लेकिन वेब एडमिनिस्ट्रेटर राजीव झा'क व्यक्तिगत व्यस्तता वा अन्य कारणे आवश्यक आश्वासनक बावजूद कोनो कार्य पूरा नहि होयब बहुत पैघ असफलताक द्योतक, एकर समाधान लेल समुचित सहकार्य के पूर्ववत् राखब जरुरी या नहि तऽ नव वेबसाइट निर्माण लेल कदम उठेबाक आवश्यकता।
  
सफलता ४. २०११ अगस्तमें विराटनगरमें संकल्प दिवस भव्यताक संग मनायल गेल - सैकडों जनसमूह दहेजक कूप्रथा विरुद्ध शपथ लेलाह। नेपालक विभिन्न एफ-एम पर अभियानक जोर-शोर सँ आवाज भेटब - हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण लगायत नेपालक विभिन्न पत्र-पत्रिकामें अभियान प्रमुखता सँ जगह पेलक जेकर सार्थक संवाद सँ लाखों जनसमूह लाभान्वित भेल। 
  
असफलता ४. २०११ में दिल्लीमें राष्ट्रीय अधिवेशन करबैत सगर मिथिलामें दहेज विरुद्ध शंखघोषके महा-योजना विफल। कारण अनेक - दिल्लीमें संगठनके कोनो मजबूत रूप नहि, जे संग वैह द्रोही... आ कतेको अन्य कारण। फलस्वरूप कार्यकारिणीमें आपसी कलह आ टूट-फूट, एक नव संस्थामें एहि तरहक व्यवहार सँ कमजोरी आयब स्वाभाविक।
  
सफलता ५. २०११ के दुर्गा पूजामें गाम-गाम भ्रमण आ अभियानक प्रचार।

असफलता ५. अभियानमें अपेक्छा सभ सदस्य सँ रहितो बहुतो गाम पधारल सदस्य द्वारा कोनो व्यक्तिगत प्रयास नहि कयला सँ हतोत्साहके प्रसार।

सफलता ६. २०११ दिसम्बरमें विराटनगरक अन्तर्राष्ट्रीय मंच सँ जनसमूह द्वारा दहेज मुक्त मिथिलाक अभियान प्रति समर्थन हेतु सहयोग के आह्वान, नेपालमें दमुमि निर्माण लेल करुणाजी द्वारा प्रतिबद्धता आ सफलतापूर्वक संस्थाक पंजियन कार्य पूरा। 

 असफलता ६. आन्तरिक राजनीति आ आरोप-प्रत्यारोप सँ पुन: आपसी विश्वासमें ह्रास, पंजियन उपरान्त सोचल कार्य में देरी। 
  
सफलता ७. सौराठ सभामें जानकी नवमी मनयबाक कार्य पूरा।
  
असफलता ७. जाहि तरहक विचार गोष्ठी करेबाक नियार छल ताहिमें घोर कमी - पुन: आपसी विश्वासमें कमीके कारण तथा अनावश्यक शंका तथा गैर‍-जरुरी राजनीतिक हस्तक्छेप सँ अभियानकेँ हतोत्साहित कैल गेल। खर्चक बावजूद आवश्यक उपयोगितामें अकाल।
  
सफलता ८. सौराठ सभा २०१२ में दू दिन सफलतापूर्वक सहभागिता।
  
असफलता ८. सौराठ सभा २०१२ में राजनीति हस्तक्छेपके कारण शिथिलता।
  
सफलता ९. दुर्गा पूजा २०१२ में पुन: गाम-भ्रमण आ सौराठ धरोहर के पुनरुत्थान संग माँगरूपी दहेजक प्रतिकार लेल प्रत्येक गाममें एक समिति निर्माण लेल अनुरोध। आगामी सौराठ सभा २०१३ तक एकर प्रतिवेदन प्रकाशन करबाक नियार।

असफलता ९. हरेक कार्य करबाक लेल समूहगत प्रयासके सार्थकता बुझबा में अधिकांश सदस्य असमर्थ आ बस केवल आपसी कट्टी-फट्टी खेल में महत्त्वपूर्ण कार्य करबा तरफ किनको ध्यान नहि होयब।

सफलता १०. राष्ट्रीय स्तर केर पंजियन लेल समस्त कागजी कार्य पूरा - दिल्लीमें आवेदन जमा। पंजियनक प्रक्रिया निरंतरतामें।

सफलता ११. सौराठ सभा २०१२ सँ दू दूल्हाक दहेज मुक्त विवाह करबाक कारणे सम्मान कार्यक्रम विराटनगर के अन्तर्राष्ट्रीय मंच सँ नेपालक उप-प्रधान तथा गृहमंत्री विजय कुमार गच्छदार द्वारा प्रशस्ति पत्र तथा उपहार प्रदान करबाक कार्यक्रम दहेज मुक्त मिथिला (नेपाल) - अध्यक्छा श्रीमती करुणा झा आ सहकार्य मैथिली सेवा समिति - विराटनगर।

असफलता ११. मधुबनीमें औझके दिन तेसर वर्षगांठ मनयबाक लेल अन्तर्विद्यालय स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता सँ युवा-पीढीक मानसिकता ऊपर आवश्यक प्रेरणा-स्थापना पर परीक्छा आ संयोजकक अनावश्यक भय तदोपरान्त पलायनवादी मानसिकताक कारणे विफलता।

आगामी योजना:

१. अप्रील २०१३ में मधुबनीमें ‌प्लस २ स्तर के परीक्छा देल छात्र-छात्रा द्वारा दहेज विषय पर वृहत् वाद-विवाद प्रतियोगिताक आयोजन।


२. कम से कम एको गाम में ५ गरीब छात्राक पढाई करेबाक लेल संस्था द्वारा गोद लेबाक प्रक्रिया।


३. नेपालमें प्रत्येक महीना विद्यालय-महाविद्यालय स्तरीय युवा-युवती द्वारा वैचारिक आदान-प्रदान तथा सी-एफएम राजविराज द्वारा रेडियो प्रसारण।


४. जानकी नवमी मनेबाक लेल दरभंगा जिलामें कार्यक्रम। सौराठ सभा तर्ज पर वैवाहिक योग्य युवा-युवतीक लेल सभा आयोजन पर समूह-बहस कार्यक्रम।


५. हरेक जिलामें किछु न किछु कार्यक्रम करबाक नियार। संयोजन लेल स्थानीय कार्यकर्ता व संरक्छक के खोज निरंतरतामें।


एवं बहुतो अन्य! 

महत्त्वपूर्ण नोट:१. दहेज मुक्त मिथिला कोनो एनजीओ नहि छी - ई स्वस्फूर्त एवं स्वयं-सहयोगी युवा ताहू में अपन पैर पर ठाड्ह ओहेन युवा शक्ति जिनकामें किछु सार्थक कार्य करबाक लेल त्याग करबाक संग समर्पित रहबाक प्रतिबद्धता सेहो छन्हि। ताहि हेतु शुरुएमें पहाड ढाहय के सपना देखब अतिश्योक्तिपूर्ण अपेक्छा करब होयत। स्पष्ट करी जे आइ धरि लगभग लाख में खर्च कैल गेल अछि जे मात्र जनमानसमें ई चर्चा शुरु करा सकल अछि जे दहेज मुक्त मिथिला नामक अभियान जमीनपर उतरल अछि, आ जखन नामक चर्चा शुरु भेल तऽ अवश्य एकर शीघ्र सार्थक प्रभाव सेहो देखय में आयत। लेकिन दिल्ली एखनहु एहि लेल दूर अछि जे आन्दोलनमें जुडनिहार लोकके संख्या लगभग नगण्य अछि। २०१३ ई. एहि सपना के पूरा करत तेकर पूर्ण तैयारी अछि। 

२. दहेज प्रथा आ सम्बन्धित अनेको बात लेल समाजमें बहुतो तरहक भ्रम-भ्रांति पसरल अछि, ताहि सभके समाधान लेल हमरा लोकनिक शोध कार्य निरन्तरतामें अछि। एहि सभ के अध्ययन लेल निम्न लिंक सभ पर जरुर विजीट करी।
  

  
  

(उदाहरणार्थ: दहेज ओ नहि जे लडकीवालाक माँग विरुद्ध माँग कैल गेल हो, बल्कि समस्त माँग जे लैंगिक विभेद उत्पन्न करैत हो आ आपसी विश्वास व स्वेच्छाचारिताक विरुद्ध हो। आदर्श विवाह केहेन हो। दहेज पर भारतीय संविधान कि कहैत अछि। समूहमें कोन लडका वा लडकी अपन विवाह दहेज मुक्त करय लेल चाहैत छथि। एहेन बहुत तरहक तथ्यांक व सैद्धान्तिक निरूपण करबाक निरन्तर प्रयास करबाक लेल हम सभ दृढ-प्रतिग्य छी।)

दहेज मुक्त मिथिला कार्यालय (भारत): ई -७५, सोम बाजार, नन्हे पार्क,नयी दिल्ली ११० ०५९,भारत।
फोन: ०९९१०६०७७२० (संतोष नारायण चौधरी ) एवं ०९३१२४६०१५० (मदन कुमार ठाकुर )।




कार्यालय (नेपाल):राजविराज - ७, सप्तरी, नेपाल।फोन: ००९७७-३१-५२२८३०.

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रविवार, 3 मार्च 2013

मिथिलाक गामघर: pahil di safal rahal pahil maithili filim festival...

मिथिलाक गामघर: pahil di safal rahal pahil maithili filim festival...: आइ भोरे भोर दरभंगा पहुँचलौ। मैथिली फिल्म अकादमी दिससँ ओयोजित पहिल मैथिली फिल्म फेस्टिवलमे भाग लेबऽ हेतु। पहुँचैत देखलौ जे किछु मित्र ...

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