मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

आदरनीय, जगदानन्द झा ‘मनू’ भाइ आइ अपने द्वारा कयल गेल भाइ अनमोल झा केर पोथी टेक्नोलिजी केर समक्षा पढ़लौ।

आदरनीय,
जगदानन्द झा ‘मनू’

भाइ आइ अपने द्वारा कयल गेल भाइ अनमोल झा केर पोथी टेक्नोलिजी केर समक्षा पढ़लौ। समीक्षा नीक अछि वा बेजाय एहिपर हम अपनेसँ किछु प्रश्न नञि करऽ चाहब। कारण पोथीक समक्षा क्यौ अपना स्तरसँ करैत अछि। सम्भव अछि जे रचना हमरा नीक लागल होयत से अपनेक नीक नञि लागल होयत। तहिना एहि पोथीक जे कथा अहाँके ँ नीक लागल होयत से हमरा नञि। आब आबी अपन मूल उद्देश्यपर........भाइ समीक्षाक क्रममे अहाँ विहनि कथाक पुरजोर पैरवी करैत लिखलहुँ अछि जे ‘विहनि कथा आब कोनो तरहक परिचय लेल मोहताज नहि अछि। श्री जगदीश प्रसाद मंडलजी अपन विहनि कथा संग्रहपर टैगौर पुरस्कार जीत कए दुनियाँक बड़का-बड़का भाषाकेँ एहि दिस सोचै लेल बिबस कए देलखिन्ह। अंग्रेजी एकरा SEED सीड स्टोरीह्व कहि सम्बोधित केलक। हिंदी अंग्रेजीमे जकर कोनो स्थान नहि ओहेन एकटा नव बिधाक अग्रज मैथिली साहित्य आ ओ बिधा, ह्लविहनि कथाह्व।
विहनि कथा आ लघु कथामे बहुत फराक अछि। विहनि अर्थात बिया। बिया वटवृक्षकेँ सेहो भऽ सकैए आ सागक सेहो। तेनाहिते मोनक बिचारक बिया जे कोनो आकारमे फूटि सकैए, विहनि कथा। विहनि, बिया, सीडमे सँ केहन गाछ पुट्टै कोनो आकारक सीमा नहि। लघु कथा मने एकटा छोट कथा जेकर आरम्भ आ अन्त दुनू छैक’।

भाइ अपनेसँ हम किछु प्रश्नक उत्तर जानबाक इच्छूक छी। जँ अपने उत्तर देब तँ नीक रहत आ हमर अज्ञानता कम होयत। भाइ अंग्रेजीमे बहुत एहन रास शब्द अछि जेकर हुबहु अनुवाद मैथिलमे सम्भव नञि अछि। अपने तर्क देलौ अछि जे अंग्रेजीक सीड्स स्टोरी तर्जपर विहनि कथाकेँ मान्यता देल गेल अछि। के देलक ई मान्यता? कहिया स्थापित भेल ई विहनि कथाक विद्याा? की मात्र किछु गोटे द्वारा लिखल वा अपनाओल गेल विद्याकेँ मान्यता देल जा सकैत अछि। जँ हाँ तँ सम्भव अछि जे काल्हि किछु गोटे कहता जे हम एहि विद्याकेँ विहनि नञि मानि पनका कथा कहब। उल्लेखनीय अछि जे बियासँ पहिल अंश निकलैत अछि ओकरा पनका कहल जाइत अछि।

जँ दू क्षण लेल विहनि कथाकेँ मान्यता देले जाय तँ अहाँक अनुसार जगदीश प्रसाद मण्डलक ‘गामक जीनगी’ विहनि कथा कोना भेल? की 1000-12000 शब्दमे लिखल कथाकेँ विहनि कहल जाइत अछि। जँ एकरा विहनि कहबै तँ 1500-2500 शब्दक बीचमे लिखल कथाकेँ कहल जायत??

भाइ हमरा जनतबे आइ धरि मैथिलीमे लघु आ दीर्घ कथाक मान्यता छल। आइयो अछि। एहिमे कोनो गलत बात नञि जे 2000 शब्द वा एहिसँ किछु बेसी शब्द वला कथाकेँ लघु आ एहिसँ बेसी शब्द वलाकेँ दीर्घ कहल जाइत अछि।

सावधान भाइ मात्र किछु गोटे केर समर्थन पेबा लेल आ अपन नाम कमेबा लेल किछु नञि लिखी कारण हमरा अहाँ सुमनजी, किरणजी, यात्री, मधुप, मण्पिद्म, राजकमल, ललित, प्रभास चौधरी, भीम नाथ झा, आदि लेखकसँ बेसी ज्ञानी वा बूझनूक तँ एखन धरि नञि भेलौ अछि। ईहो बात नञि अछि जे हिनका लोकनिक समयमे ई विद्या नञि रहल होयत।

जँ विहनि कथा पहचान बना लेलक अछि तँ अकादेमी वा अन्य मैथिली साहित्य संस्था एकरा एखन धरि मान्यता कियक नञि देलक??

अन्तमे जँ हमरा बातसँ अपनेक कोनो तरहक कष्ट पहुँचल हो...तँ छोट भाइ जानि माफ करब


अपनेक
रोशन कु मार मैथिल
मिथिला आवाज, दरभंगा मिथिला
08292560971

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सोमवार, 7 अक्तूबर 2013

एतेक दिन कोना कऽ बितल, कहिया किछु बतलायब,

एतेक दिन कोना कऽ बितल, कहिया किछु बतलायब, 
की सभ दिन एहिन चुपचाप रहि ,जीते-जी मरि जायब,...

सुनलौ अछि यादक फुलवारी, उजड़ि चुकल अछि रमन चमन,
हमरा हृदयक पनघटकेँ कहिया ,स्नेह-सिञ्चित कऽ जायब,.....

अहाँक पत्रकेँ एखनो सदखिन, हम पढ़ै छी एसगरमे,
कहिया आहा पहिने जका, चिट्ठिमे दरश देखायब,....

मानै छी रञ्जिश अछि, दुख अछि, कतऽ नञि अछि, अही कहु?
बस एतबे बातक खातिर की हमरा छोडि चलि जायब,....

सुनलौ अछि जे एहि बेरक सावन आयल आ चुप चुप चलि गेल,
अरमानक पतझड़िमे की अहाँ पत्तासँ झरि जायब ,.....


लेखक- गुञ्जन श्री
अनुवादक-रोशन कुमार मैथिल

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