बुधवार, 31 जुलाई 2013

भिखारिन-हिन्दीसँ अनुवादित कथा- लेखक*रवींद्रनाथ टैगोर अनुवादक -रोशन कुमार मैथिल

भिखारिन-हिन्दीसँ अनुवादित कथा-  लेखक*रवींद्रनाथ टैगोर
अनुवादक -रोशन कुमार मैथिल

अन्हरी प्रतिदिन मन्दिरक दुआरिपर जा ठाढ़ होइत छली, दर्शन के निहार बाहरि निकलैत छल तँ ओ अपन हाथ पसारि दैत छली आ नम्रताक संग कहैत छली जे - बाबूजी, अन्हरीपर दया कयल जाउ।

ओ जानै छली जे मन्दिरमे आबऽ वला सहृदय आ श्रध्दालु होइत छथि। ओकर ई अनुमान असत्य नञि छल। आबऽ-जाय वला दू-चारि पाइ ओकरा हाथपर राखियो दैत छला। अन्हरी हुनका लोकनिकेँ आशीष दैत छली आ हुनका लोकनिकेँ सहृदयताकेँ सराहना करैत छली। स्त्री लोकनि सेहो ओकरा खोइछामे कनी मनी अन्न दऽ जायल करैत छली।

भोरसँ साँझ धरि ओ एहि प्रकारे हाथ पसार ठाढ़ रहैत छली। एकरा बाद ओ मने मन भगवानकेँ प्रणाम करैत छली आ अपन लाठीक मदतिसँ झोपड़ीक बाट दिस विदा भऽ जाइत छली। ओकर झोपड़ी नगरिसँ बाहरि छल। बाटमे ओ सेहो याचना करैत जाइत छली, ओना राह-बटोही लोकनिमे बेसी संख्या श्वेत वस्त्र वलाकेँ होइत छल, जे पाइ देबाक बदला दबारि दैत छल। तखनो अन्हरी निराश नञि होइत छली आ ओकर याचना बराबर चलैत रहैत छल। झोपड़ी धरि पहुँचैत पहुँचैत ओकरा दू चारि पाइ आरो भेट जाइत छल।

झोपड़ीक लग पहुँचैत देरी एक गोट दस बरख लड़का कूदैत फानैत ओकरासँ चिपटि जाइत छल। अन्हरी टटोलबाक बाद ओकर माथकेँ चूमैत छली।

बच्चा के  अछि? केकर अछि? कतऽ सँ आयल? एहि बातसँ कोनो परिचय नञि छल। पाँच बरख भेल पास-पड़ोसक लोक  ओकरा एसगर देखने छल। एहि क्रममे एक दिन साँझक समय लोक सभ ओकर कोरामे एक गोट नेनाकेँ देखलक , ओ कानि रहल छल, अन्हरी ओकर मुख चूमि-चूमि कऽ ओकरा चुप करेबाक प्रयास कऽ रहल छली। ई कोनो असाधारण घटना नञि छल, अत: क्यौ नञि पूछलक जे बच्चा केकर अछि। ओहि दिनसँ ई बच्चा अन्हरीक लग रहैत छल आ खुश छल। ओकरा ओ अपनासँ नीक नीकुति भोजन करबैत छल आ पहिरबैत छल।

अन्हरी अपन झोपड़ीमे एक गोट हाण्डी गाड़ि कऽ रखने छली। साँझक समय जे किछऊ माङि कऽ ओन आनैत छल तकरा ओहिमे धऽ दैत छल आ कोनो वस्तुसँ ओकरा झापि दैत छल। कारण दोसर व्यक्तिक नजरि एहिपर नञि पड़ै। भोजन लेल अन्न बड़ बेसी भेट जाइत छल। ओहिसँ ओ काज चलबैत छली। पहिने नेनाके ँ पेट भरि खूआ दैत छली तकर बाद अपने खाइत छली। रातिकेँ ओ बच्चाकेँ अपना छातीसँ लगा पड़ल रहैत छली। भोर होइ देरी ओकरा खूआ पिया मन्दिरक दुआरिपर जा ठाढ़ होइत छली।
2

काशीमे सेठ बनारसीदास बहुत प्रसिध्द व्यक्ति छथि। धिया पुता लोकनि हुनका कोठीसँ परिचित अछि। बहुत पैघ देशभक्त आ धर्मात्मा छथि। धर्ममे हुनकर बड़ बेसी सुचि छनि। दिनक बारह बजे धरि सेठ स्नान-ध्यानमे संलग्न रहैत छला। कोठीपर सदिखन भीड़ लागल रहैत छल। कर्जक इच्छुक सभ तँ आबिते छला, मुदा एहन व्यक्ति लोकनिक सेहो ताता लागल रहैत छल जे अपनी पूञ्जी सेठजीक लग धरोहरक रूपमे राखऽ आबैत छला। सैकड़ो भिखारी अपन जमा-पूञ्जी एहि सेठजीक लग जमा कऽ जाइत छल। अन्हरीकेँ सेहो ई बात बूझल छल, मुदा नञि जानि एखन धरि ओ अपन कमाइ एतऽ जमा करेबामे किया हिचकिचा रहल छली।

ओकरा लग बेसी टाका भऽ गेल छल, हाण्डी लगभग पूर्ण तरहे भरि गेल छल। ओकरा शंका छल जे क्यौ चुरा नञि लय। एक दिन साँझक समय अन्हरी ओहि हाण्डीकेँ उखाड़लक आ अपन फाटल आंचरमे नूका सेठजीक कोठीपर पहुँचल।

सेठजी बही-खाताक पेजकेँ उनटि पुनटि रहल छला, ओ पूछलनि- की गे बुढ़िञा?

अन्हर हाण्डी ओकरा आगामे सरकार देलक आ डरैत डरैत कहलक- सेठजी, एकरा आहाँ अपन लग जमा कऽ लियऽ, हम अन्हार, अपाहिज कतऽ एकरा राखने खूरब।

सेठजी हाण्ड दिस देखलनि आ कहलनि जे एहिमे की अछि?

अन्हरी उत्तरि देलक- भीख माङि-माङि अपन नेना लेल दू चारि टाका जमा केलौ अछि, अपना लग रखबामे डर होइत अछि, कृपया एकरा अहाँ अपना कोठीमे राखि ली।

सेठजी मुंशी दिस संकेत करैत कहलनि- खातामे जमा कऽ दियौ। फेरो बुढ़ियासँ पूछा-तोहर नाम की अछि?

अन्हरी अपन नमा बतेलक, मुंशी नकद गिन कऽ ओकरा नामसँ जमा कऽ लेलनि आ ओ सेठजीकेँ आशीर्वाद दैत अपन झोांड़ीमे चलि गेली।

3

दू बरख बहुत सुखक संग बीतल। एकर पश्चात एक दिन लड़काकेँ ज्वर आबि गेल। अन्हरी दवा-दारू केलक, झाड़-फूंकसँ सेहो काम लेलक, टोना-टोटकाक परीक्षा के लक, मुदा सम्पूर्ण प्रयत्न व्यर्थ सिद्ध भेल। लड़क ाक दशा दिन-प्रतिदिन खराब होाइत गेल। अन्हरीक ह्दय टूटि गेल। निराश भऽ गेल। ओना फेरो ध्यान आयल जे सम्भवत: डॉक्टरक इलाजसँ लाभ भऽ जाय। ई विचार आबैत देरी ओ खसैत पड़ैत सेठजीक कोठीपर आयल। सेठजी उपस्थित छला। अन्हरी कहलक- सेठजी हमर जमा-पूञ्जीमेसँ दस-पाँच गोट टाका भेट जाय तँ बड़ कृपा होयत। हमर बच्चा मरि रहल अछि, डॉक्टरकेँ दिखायब।

सेठजी कठोर स्वरमे कहलनि जे - कहन जमा पूञ्जी? के हन टाका? हमरा लग के करो कोनो पाइ जमा नञि अछि।

अन्हरी कानैत कानैत उत्तर देलक- दू बरख भेल हम अहाँ लग अपन धरोहन राखि गेल छलौ। दऽ देब तँ बड़ पैघ दया होयत।

सेठजी मुनीमक दिस रहस्यमयी दृष्टिसँ देखैत कहलनि- मुंशीजी, कनी देखु तँ, एकरा नामपर कोनो पूञ्जी जमा अछि की? तोहर नाम की छियौ गै?

अन्हरीक जानमे जान आयल। आशा बन्हायल। पहलि उत्तर सुनि ओ सोचली जे सेठ बैमान अछि, मुदा आब सोचऽ लागली जे सम्भवत: ओकरा ध्यान नञि रहल होयत। एहन धर्मी व्यक्ति भला झूठ बाजि सकैत अछि? ओ अपन नाम बता देलक। उनटि-पुनटि कऽ देखल गेल। फेरो कहलक- नञि तँ। एहि नामपर कोनो टाका जमा नञि  अछि।

अन्हरी ओतहि जमि कऽ बैसल रहली। ओ कानैत कानैत कहलनि- सेठजी, परमात्माक नाम पर, धर्मक नाम पर, किछु दऽ दियऽ।हमर बच्चा जीब जायत। जीवन-भरि आहाँक गुण गायब।

मुदा पाथरमे जोंक नञि लागल। सेठजी तमसाइत कहलनि- जेमे की नौकर सभकेँ बजबियौ।

अन्हर लाठीक दमपर ठाढ़ भऽ गेली आ सेठजीक दिस मुंह ताकैत बजली- चलू भगवान आहाँक बड़ बेसी दय। आ ओ अपन झोपड़ी दिस चलि देलक।

ई आशीष नञि छल अपितु एक दुखहारिणक शाप छल। बच्चाक दशा बिगड़ैत गेल। दवा-दारू भेबे नञि कयल। तखन लाभ कियक होइतै। एक दिन ओकर अवस्था चिन्ताजनक भऽ गेल। प्राण बचब कठिन भऽ गेल। ओकरा बचबाक आश अन्हरी सेहो छोड़ि देने छली। सेठजीपर रहि-रहि कऽ ओकर तामश आबैत छल। एते धनी व्यक्ति अछि। दू चारि टाका दऽ दैतै तँ भऽ जायतै ओकर। हम ओकरासँ दान तँ नञि माङि रहल छला। अपना जमा कयल टाका माङबा लेल गेल छलौ। सेठजीसँ ओकर घृणा भऽ गेल।

बैसल बैसल ओकरा कि छु ध्यान आयल। ओ अपन बच्चाकेँ कोरामे उठा खसैत पड़ैत सेठजीक लग पहुँचली आ हुनका दुआरिपर धरना दऽ बैस गेली। बच्चाक शरीर ज्वरसँ भभकि रहल छल आ अन्हरीक कलेजा सेहो।

एक गोट नौकर कोनो कामसँ बाहर आयल। अन्हरीकेँ बैसल देख ओ सेठजीकेँ सूचना देलक। सेठजी आज्ञा देलनि जे ओकरा भगा देल जाय।

नौकर अन्हरीसँ चलि जेबा लेल कहलक, मुदा ओ ओहि स्थानपरसँ नञि हिलली। मारबाक डर देखेलक, मुदा ओ टससँ मस नञि भेल। ओ फेरो अन्दर जा कहलक जे ओ नञि जा रहल अछि।

सेठजी स्वयं बाहर एला। देखैत देरी चिह्न गेला। बच्चाकेँ देख हुनका बड़ बेसी आश्चर्य भेल जे ओकर शक्ल-सूरत हुनकर मोहनसँ बड़ बेसी मिलैत जुलैत अछि। सात बरख भेल तखन मोहन कोनो मेलामे हरा गेल छल। ओकर बहुत ताका हारि कयल गेल, मुदा ओकर कोनो पता नञि चलल। हुनका मोन पड़ल जे मोहनक जांघपर एक लाल रंगक चिन्ह छल। एहि विचारकेँ आबैत देरी ओ अन्हरीक कोराक बच्चाक जांघ देखलनि। चिन्ह अवश्य छल, मुदा पहिनेसँ किछु पैघ। हुनका विश्वास भऽ गेल जे ई बच्चा हुनकर छनि। तुरन्त ओकरा छीन ओ अपन कलेजासँ बच्चाकेँ लगा लेलनि। देर बुखारसँ तपि रहल छल। नौकरकेँ डाक्टर आनबा लेल पठौलनि आ अपने स्वयं घरक अन्दर चलि देलनि।

अन्हरी ठाढ़ भऽ गेल आ चिकरऽ लगली- हमर बच्चाकेँ नञि लऽ जाउ, हमर टाकातँ हजम कऽ गेलौ आब की हमर बच्चा हमरासँ छीनब।

सेठजी बहुत चिन्तित भेला आ कहलनि जे बच्चा हमर अछि। यैह बच्चा अछि जे सात बरख पहिने कतौ हेरा गेल छल आब भेटल अछि। आब एकरा कतौ नञि जाय देब। लाख प्रयास कऽ एकर प्राण बचायब।

अन्हरी जोरसँ ठहाका लगेलनि- तोहर बच्चा अछि, एहि लेल लाख प्रयास कऽ ओकर बचायब। हमर बच्चा रहितै तँ ओकर मरि जायब दैतौ, की? ईहो कोनो न्यास अछि। एतेक दिन धरि खून-पसीना एक कऽ ओकरा पोसलौ अछि। हम ओकरा अपन हाथसँ नञि जाय देब।

सेठजीक दशा अजीब छल। किछु केनेसँ बात नञि बनि रहल छलनि। किछु काल ओ चुपचार ठाढ़ रहला फेरो मकानक अन्दर चलि गेला। अन्हरी किछु समय धरि ठाढ़ कानैत रहली फेरो अपन झोपड़ी दिस चलि देलक।

दोसर दिन भोरमे भगवानक कृपा भेल वा दवाइ जादू सन प्रभाव देखेलक। मोहनक बुखार उतरि गेल। होश एबापर ओ आँखि खोललक तँ सभसँ पहिल शब्द ओकरा मुँहसँ निकलल माँ।

चहुंओर अपरिचित शक्ल देख ओ अपन आखि फेरो बन्न कऽ लेलक। ओहि समयसँ ओकर बुखरा फेरोसँ बेसी होयब प्रारम्भ भऽ गेल। मां-मां केर रट लागल छल। डॉक्टर लोकनि सेहो जवाब दऽ देलनि। सेठजीक हाथ पैर फू लि गेल। हुनका चहुुओर अन्हार देखइ देबऽ लगलनि।

की करी एक गोट बच्चा अछि। एतेक दिनक बाद भेटबो कयल तँ मृत्यु ओकरा अपना मुट्ठिमे दबा रहल अछि।  एकरा कोनो बचाबी?

अचानक हुनका अन्हरीक ध्यान आयल। पत्नीकेँ बाहर पठौलनि जे देखु जे ओ एखन धरि ओ दुआरिपर नञि बैसल होइञ मुदा ओ ओतऽ कहाँ छल? सेठजी फिटन तैयार करौलनि आ बस्तीसँ बाहर ओकरा झोंपड़ीपर पहुँचलनि। झोपड़ी बिना केबाड़क छल। अन्दर गेला। देखलनि एक गोट फाटल-पुरान टाटपर अन्हरी पड़ल अछि। ओकरा आँखिसँ नोर बहि रहल अछि। सेठजी आस्तेसँ ओकर हिलेलनि। ओकर देह सेहो आगिक भाँति तपि रहल छल।

सेठजी कहलनि-बुढ़िया! तोहर बच्चा मरि रहलौ अछि। डॉक्टर सेहो निराश भऽ गेल अछि। रहि रहि ओ तोरा चिकरि रहल छौ। आब तूही ओकर प्राण बचा सकै छ:। चल आ हमर...नञि नञि तु अपन बच्चाक जान बचा ले।

अन्हरी उत्तर देलक - मरैत अछि तँ मरऽ दियौ। हम सेहो मरि रहल छी। हम दुनू स्वर्ग-लोकमे फेरोसँ मां-बेटाक तरहे मिल जायब। एहि लोकमे सुख नञि अछि। ओतऽ हमर बच्चा सुखमे रहत। ओतऽ ओकर सुचारू ढ़गसँ सेवा-सुश्रूषा करब।

सेठजी कानऽ लगला। आइ धरि ओ किनको सोझामे माथ नञि झूकेने छला। ओना एखन ओ अन्हरीक पैरपर खसि पड़ला आ कानैत कानैत कहलनि- ममाताक राख राखि ले। तु हु तँ ओकर माँ छ: चल, तोरा जेबासँ ओ बचि जायत।

ममता शब्द अन्हरीकेँ विकल कऽ देलक। ओ तुरन्त कहलक - ठीक अछि चलु।

सेठजी सहारा दऽ ओकरा फिटनपर बैसौलक। फिटन घरक दिस दौड़ऽ लागल। ओहि समय सेठजी आ अन्हरी भिखारिन दुनूक दशा एक छल। दुनू केर ई इच्छा छल जे शीघ्र-सँ-शीघ्र अपन नेना लग पहुँचि जाय।

कोठी आबि गेल। सेठजी सहारा दऽ अन्हरीकेँ उतारि अन्दर लऽ गेला। भीतर जा अन्हरी मोहनक माथपर हाथ फेरलनि। मोहन पहचानि गेल जे ई ओकर मायक हाथ अछि। ओ तुरन्त आँखि खोलि देलक आ ओकरा अपना लगमे ठाढ़ देख कहलक-मां, तु आबि गेलऽ।

अन्हरी भिखारिन मोहनक सिरौहनामे बैस गेला आ ओ मोहनक माथ अपना कोरामे राखि लेलनि। हुनका बड़ बेसी सुखक अनुभव भेलनि आ ओकरा कोरामे तुरन्तमे सुति गेल।

दोसर दिनसँ मोहनक दशा नीक होबऽ लागल। दस-पन्द्रह दिनमे ओ बिल्कुल स्वस्थ भऽ गेल। जे काम हकीमक जोशान्दा, वैद्यक पुड़िया आ डॉक्टर लोकनिक मिक्सचर नञि कऽ सकय से ओहि अन्हरीक स्नेहमयी सेवा पूरा कऽ देलक।

मोहनक पूर्ण तरहे स्वस्थय भऽ जेबापर अन्हरी विदा माङलक। बहुत-किछु कहला-सुनबाक बादो जखन ओ ओ हुनका लग रहबा लेल तैयार नञि भेल तखन विवश भऽ हुनका विदा करऽ पड़ल। जखन ओ चलऽ लागल तँ सेठजी टाकाक एक गोट झोरी ओकरा हाथमे दऽ देलनि। अन्हरी पता केलक जे एहिमे की अछि?

सेठजी कहलनि जे -एहिमे तोहर धरोहर अ,ि तोहर टाका। हमर ओ अपराध।

अन्हरी बात काटि कऽ कहलनि- जे ई टाका तँ हम तोहरे मोहन लेल संग्रह केने छल। ओकरे दऽ देब।

अन्हरी झोरी छोड़ि देलक आ लाठी टेकै त चलि देलक। बाहर निकलि कऽ ओ फेरो ओ ओहि घरक दिस आँखि उठा देखलक। सेठक नेत्रसँ नोर बहि रहल छल, मुदा ओ एक गोट भिखारिन हेबाक बाद ओहि सेठसँ महान छली। एहि समय सेठ याचक छला ओ दाता छली। 

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रविवार, 28 जुलाई 2013

जन्मदिनक चिट्ठी कथा

जन्मदिनक चिट्ठी कथा

सेतू जन्मदिनक पाँच दिन पहिनेसँ घरमे अनघोल केने छल जे एहि बेरका जन्म दिन पछिला बरखक तुलनामे नीकसँ मनायब। एना करब, ओना क रब। हिनका बजायब, हुनका बजायब। कुल मिला कऽ ओ जन्म दिनक तैयारी करबामे जूटि गेल छल। रहि रहि कऽ ओ अपना मायक गर्दनि पकरि कऽ कहै माँ कहि ने एहि बेर हमरा जन्म दिनपर की सभ बनतै?? देख पछिला बेर बाबुजी जे कपड़ा कीन कऽ देने रहथिन से हमरा नञि पसिन पड़ल छल। एहि बेर हम अपना पसनसँ कीनब। माय ओकरा बातपर कोनो जवाब नञि दै। बस मने मन मुस्किया दैत छल। सेतू किछु कालक बाद फेरो मायसँ पुछऽ लागल। माय एहि बेर हम अपना जन्मदिनमे दोस्त सभकेँ सेहो बजायब। ओ लोकनि अपना अपना जन्मदिनमे हमरा बजबैत अछि। तु ओकरा सभ लेल नीक वस्तु बनेबे ने? माय अन्तमे हारि कऽ सेतूकेँ दबारि देलक। जो तोरा काम धाम तँ छौ ने पाँच दिन पहिनेसँ जन्मदिनक बारेमे सोचि रहल छऽ। की जाने गेलौ जे एहि बेर जन्मदिन हेतौ की नञि।
मायक कुबोल भाखा सुनि सेतू चुपचाप मन मोससि कऽ खेलऽ लेल चलि गेल।
सेतू कक्षा पाँचक छात्र छल। ओकर पिताजी छोट छीन दोकान चला अपन परिवारक पेट चलबैत छला। दोकानसँ एतेक कमाइ नञि होइत छल जे घरक खर्चाक अतिरिक्त आन आन छोट खर्चा निकालल जा सकय। एहि लेल सेतू केर माय अपन घरक दू गोट कोठली भारापर लगा देने छली। सेतू ओना तँ मात्र 10 बरखक छल, मुदा ओकरा नीक जका बूझल छलै जे ओकर घरक स्थिति ओकर पित्ती सभक तुलनामे बड़ खराब अछि। दादा तँ ओकरा बड़ मानै छथिन, मुदा दादी, बड़का कका, छोटका कका आ दुनू काकी हुनका माय आ बाबुकेँ टोकबो नञि करै छथिन।
एतेक बात बूझल हेबाक बोद किछु छल ओ छल तँ अबोध नेना।

जेना जेना जन्मदिन लगीच आबि रहल छल तेना तेना सेतू केर मायक चिन्ता बढ़ि रहल छल। सेतूसँ बेसी चिन्ता ओकरा छलै। कारण ओ बूझैत छल जे सभ बरख सेतू केर जन्मदिन मानायल जाइत अछि। जँ एहि बेर कोनो कारण वस नञि भऽ सक तै तँ ओकरा बड़ खराब लागत।

सेतू आब अपन जन्मदिनक  कोनो बात मायक लगमे नञि बाजैत छल, मुदा अपन बहिन महिमा संगे ओ जन्मदिनक पूर्ण तैयारी कऽ रहल छल।

आइ रवि अछि। सेतूक जन्मदिन वला रवि। सेतू केर पिता भोरे 5 बजे दोकान चलि गेला। कारण शहरमे कोनो सरकारी परीक्षाक आयोजन अछि। हुनका पूर्ण विश्वास छलनि जे विभिन्न ठामसँ आयल छात्र छात्रा लोकनि कलम, पेंसिल, रबर आदि कीनऽ लेल अवश्य एता। सेतू केर माय जखन सुति कऽ उठली तँ देखलनि जे सेतू केर पिता घरमे नञि छथि। ओ बूझि गेला जे सम्भवत: आइ सवेरे दोकान खोलऽ लेल ओ चलि गेला। किछुए कालमे ओ चिन्तित होबऽ लागली। सहसा हुनका मोन पड़लनि जे आइ सेतू केर जन्मदिन अछि। की पता हुनका स्मरण छनि की नञि। ओमहर आन दिनक समान सेतू बिछावनसँ उठबाक बाद पर-पायखान गेल। एकरा बाद ओ चुपचाप घरमे जा सुति रहल। माय जानि गेली जे आइ सेतू रूसल अछि। ओ ई सोचिये रहल छली की एक गोटे हाथमे एक लीटर दूध नेने आयल। ओ व्यक्ति सेतू केर मायसँ कहलक जे महिमाक पिता ई दूध पठेलनि अछि। एक लीटर दूध देख सेतू मायक चिन्ता आरो बढ़ि गेल। कारण आइ घरमे एक लीटर दूधसँ की होयत। जन्मदिन मनेबा लेल कमसँ कम तीन वा चारि लीटर दूध तँ चाहिबे करी। एक लीटर दूध तँ प्रति दिन चाहमे आ सेतू-महिमाक जलखैमे समाप्त भऽ जाइत अछि।
सहसा सेतू केर मायकेँ मोन पड़लनि जे सम्भवत: हुनका मोन नञि होनि जे आइ सेतू केर जन्म दिन अछि। फोन करबा लेल ओ मोबाइल दिस दौगली, मुदा निराशा हाथ लागल। कारण मोबाइलमे बैलेंस नञि छल। आब तँ हुनका किछु फूरा नञि रहल छलनि जे आखिर ओ करती तँ की करती। तखन ओ देखलनि जे हुनका घरमे रहि रहल व्यक्ति तैयार भऽ कतौ जेबाक सुरसार कऽ रहल छला। सेतू केर माय धीरसँ ओहि व्यक्तिसँ पूछलनि। की अंहा टीशन होइत बजार जायब की? हाँ मे उत्तर भेटबाक बाद ओ हुनकासँ आग्रह केलनि जे ओ एक गोट पुर्जी लिख कऽ दै रहल छथि जेकरा सेतू केर पिताकेँ देबाक अछि। संगे ओ ओहि व्यक्तिकेँ दू लिटर दूध आनबा लेल पाइ सेहो देलनि। हुनकर सोच छलनि जे किछु होउ वा नञि सेतुक जन्मदिनपर तसमै तँ बनाओल जाये सकैत अछि।

ओ व्यक्ति टाका आ पुर्जी लऽ चुपचाप घरसँ बजार दिस निकलि गेल। नञि जानि बाटमे ओकरा की फुरेलै ओ पुर्जी निकाली कऽ पढ़ लागल। ओहिमे लिखल छल।
धारा तेल-2 किलो, रिफाइल 2 किलो, मटरपनीर 1/2 किलो, कटहर-1 किलो, मटर-1/2 किलो, आदि....

पुर्जीक अन्तमे दू लाइन समाद सेहो लिखल छल।
-आइ सेतूक जन्म दिन अछि। सभटा समान कीन दूपहर 1 बजे धरि घर आबि जायब। सेतू भोरेसँ रूसल अछि।

ई चिट्ठी पढ़ि ओहि व्यक्तिक मोन अनमना गेल। ओ दोकानपर जा पुर्जी सेतू केर पिता कऽ दऽ देलनि। दोकानपरसँ निकलबाक बाद ओ भरि दिन सोचैत रहल जे विज्ञान भने कतबो विकसित कियक नञि भऽ जाय, समयपर पुरने वस्तु काज दैत अछि। मोबाइल केर युग सभ ठाम कियक नञि पसरि जाय। आइ सेतू मायक  मदति वैह पुरना चिट्ठी वला माध्यम केलक। की एहि सभ लेल हमरा लोकनि कतौ ने कतौ दोषी नञि छी????

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शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

गोनू झा के स्वर्ग बजाहट

गोनू झा एकटा राजाक दरबारी रहथि । ओ बहुत चतुर छलथि आओर राजाक राज-काज मे मदद करैत छलथि आओर हुनकर खूब मनोरंजन करैत छलथि ।
राजा हुनका बहु मानैत छलथिन्ह संगहि आओर लोक सेहो खूब मानैत छलैन्ह । हुनक उन्नति देखि कऽ सभ दरबारी डाह करैत छल आओर हुनका मिटा देबाक उपाय सोचैत छल । ओहि मे एकटा हजमो छल । ओकरा अपना ज्ञानक घमण्ड रहै । ओ गोनू झा के मिटेबाक बीड़ा उठेलक ।

गामक बाहर राजा के पिताक समाधि छल, राजा प्रतिदिन अपना पिताक समाधि पर फूल चढ़ावय जाय छलथि । पिता पर हुनकर अटूट श्रद्धा छल, हजमा जकर फायदा उठाबय चाहैत छल आओर एकटा चाल चलल ।
एक दिन राजा जखन पिताक समाधि पर फूल चढ़ाबेय गेला तखन ओहि पर एकटा पुर्जा राखल भेटलैन्ह । पुर्जा मे लिखल रहैय-बउआ अहाँ हमर बहुत भक्त छी हम अहाँ सँ अत्यन्त प्रसन्न छी । स्वर्ग मे हमरा पूजा-पाठ करबा मे बहुत दिक्कत होयत अछि ताहि लेल अहाँ शीघ्र गोनू झा के हमरा लग पठा दियऽ । गाम के पूरब मे जे श्मशानक मे ईंटक ढेरि अछि ओहि पर हुनका बैसा हुनका उपर दस पाँज पुआर राखि ओहि मे आगि लगा देबई तऽ ओ सीधे हमरा लग पहुँचि जैता । हम किछु दिनक बाद हुनका वापस भेज देब ।

शुभाशीर्वाद
अहाँक स्वर्गीय पिता

पुर्जा पढ़िकय राजा चकरेला, एहन आश्चर्यक बात तऽ ओ कतहु देखने नहि छलथि । ओ मोने-मोने बहुत तर्क वितर्क करय लगला ।

गोनू झाक शत्रु के ई चाल अछि या पिता जीक आज्ञा निश्*चय नई कय सकला । ओहि दिन दरबार मे आबि राजा पुर्जा के हाल सबके सुनेलनि, सभ दरबारी खुश भऽ गेल । कियो कहय लागल-गोनू झा बहुत भाग्यवान छथि ताहि लेल स्वर्ग मे महाराजा याद कैलथिन्ह । क्यो बाजय – गोनू झा कतेक बड़का पुण्यात्मा छथि जे जीवैत स्वर्ग जैता । कियो डाह करैत बाजल- हमरा सभक सौभाग्य कहाँ ! नहिं तऽ सहर्ष जैबाक लेल तैयार भऽ जैतहुँ ।
एहि पर हजमा बाजल महाराज जिनक आदेश एलन्हि हुनके जैबाक चाही नई तऽ महाराज के मोन मे दुःख हेतैन्ह । साधारण लोक सँ काज नई हेत*इ तें तऽ गोनू झा के बुलाहट भेलैन्ह ।

इमहर राजा बड़ सोच मे पड़ि गेला, कतऊ दुष्ट सभ मिलकय गोनू झा के मारबाक षड्*यन्त्र तऽ नहि रचलक अछि या ठीके पिताजी ई पुर्जा भेजने छथि । ओना अक्षर पिताजीक लिखावट सँ मिलैत अछि । अन्त मे किंकर्तव्यबिमूढ़ भऽ ओ गोनू झा सँ विचार- विमर्श कयला ।

गोनू झा एखन तक सब चुपचाप सुनि रहल छलथि । दरबारिक षडयन्त्रक अनुभव हुनका भऽ गेल छलैन्ह आ ओ एहि सँ बचबाक लेल सोचि रहल छला । हुनक कुशाग्र बुद्धि किछुये काल मे समाधान ढूंढि निकाललक । ओ कहलथिन्ह – महाराज हम स्वर्ग जैबाक लेल तैयार छी परन्च तीन शर्त अछि ।

१. हमरा तीन मास के समय देल जाय ।
२. जखन तक हम स्वर्ग सँ नहि घूमि कय आबी हमरा परिवार के सभ मास दस हजार टाका पारिश्रमिक के रूप मे देल जाय ।
३. एहि समय हमरा पचास हजार टाका देल जाय, जाहि सँ घरक सभ इन्तजाम कय कऽ जाय ।
राजा चकित भय कहलखिन-की अहाँ स्वर्ग जायब? की अहाँ एहि बात के सत्य मानैत छी ?
मोनू झा कहलखिन – महाराज हम सचमुच स्वर्ग जायब । अहाँ चिन्ता जुनि करी । उदास भाव सँ राजा गोनू झाक शर्त मानि लेलथिन । सभ दरबारी के आनन्द आओर आश्चर्य के भाव रहै । हजमा अपना जीत पर हँसि रहल छल । तीन मासक बाद राज्यक सभ लोक गांव के पुवारी कातक श्मशान पर पहुँचल जे आई गोनू झा स्वर्ग जैता । सब प्रजा दुःखी छल, राजा सेहो ओतय पहुँच कानि रहल छला । परन्च गोनू झा के मुख कनिको मलीन नई भेल छल ओ हँसिते माँटिक ढेरि पर बैस गेला आओर पुआर सँ हुनका झाँपि देल गेल एवं आगि लगा देल गेल । ई देखि राजा आओर सभ दरबारी कानि रहल छलथि ओतहि हजमा प्रसन्न भऽ रहल छल । एहि घटनाक छः मास बीति गेल छल, गोनू झा एखन तक लौट कय घर नहि आयल छलथि । ई सोचि राजा बहुत दुःखी रहैत छलाह आओर गोनू झा बिना दरबारो मे मन नई लगैत छलैन्ह ।
एक दिन राजा दरबार मे गोनू झाक चर्च करैत रहथि तऽ ओतबहि मे एक दरबारी सूचना देलक जे गोनू झा आबि रहल छथि । लोक आश्चर्य सँ चकित रहथि जे एहि खबर के झूठ मानी वा सत्य । ओतबहि मे गोनू झा अबेत देखाय लगलाह । गोनू झा पहिने सँ बेसी मोटा गेल छलथि । किछु लोक हुनका भूत बूझि भागि रहल छल, लेकिन राजा स्तम्भित छलथि ।

गोनू झा आबि राजा के प्रणाम केलखिन आओर एकटा पुर्जा राजा के दय देलखिन । किछु कालक बाद राजा कहलखिन- गोनू झा ! की अहाँ सचमुच जीवित छी?

गोनू झा हँसिकय कहलखिन- महाराज एखन तक तऽ जीवित छी । ई देखि हजमाक प्राण सुखि गेल आओर ओ डरे पसीना सँ तर-बतर भऽ रहल छल ।
गोनू झा कहलखिन- महाराज ! हम स्वर्ग सँ आबि रहल छी । अहाँक पिता ओतय बहुत खुश छथि । परंतु हुनका हजामत कराबय मे तकलीफ छैन्ह, केश-दाढ़ी सभ बढ़ि गेल छैन्ह, ताहि लेल ओ हजाम के भेजय वास्ते ई पुर्जा भेजने छथि । एहि पुर्जा मे एयह बात लीखि पठेने छथि ।
गोनू झाक बात सुनतहि हजमा भागय लागल । लेकिन सिपाही ओकरा धऽ पकड़लक । आब तऽ हजमाक दशा बिगड़ि गेल, सब दरबारी आश्चर्य सँ अवाक्छल । राजा कहलखिन- ओहि बेर जखन गोनू झा जाय छलथि तऽ तू बढ़ि- चढ़ि कय बाजेत छलें तऽ एखन डर किये होयत छउ ?

हजमा देखलक जे आब पोल खोलय पड़त, नहि तऽ मारल जायब । तें ओ थरथराईत बाजल-सरकार हमरा क्षमा करू । गोनू झा के स्वर्ग बजाबऽ वला पत्र हम लिखने छलहु ! स्वर्ग सँ कोनो पत्र नहि आयल छल ।

गोनू झा कोनो जादू – टोना जनेत छथि तें आगि सँ बचि गेला, परंच हम तऽ जरि कय मरि जायब । आब तँ राजा आश्*चर्य एवं क्रोध सँ लाल भय गेला आओर गोनू झा के पुछलखिन की बात अछि सच-सच कहू ।

गोनू झा कहलखिन- महाराज ओहि पत्र के देखिते हम बूझि गेल छलहुँ जे हमरा संगे कियो चक्रचालि खेल रहल अछि । तें अपना बचय के उपाय सोचि स्वर्ग गेनाई स्वीकार केने छलहुँ ।

तीन मासक समय लय कऽ हम ओहि माँटिक ढेरी सँ अपना घर तक सुरंग बना लेने छलहुँ आओर जखन हमरा पुआर सँ झाँपि देलक तऽ हम सुरंगक रस्ते अपना घर पहूँच गेलहुँ ।

ओमहर सब बुझलक जे आब गोनू झा जरि कय मरि गेला आओर हमर दुश्मन सभ खुशी मनाबय लागल छल । एमहर हमरा गुप्त रूप सँ पता लागल जे ई सब पूरा हजमाक षडयंत्र छल ।

ओना इ सब बिना प्रमाण के कहितउँ तऽ अहां लोकनि के फूसि लागैत तें प्रमाणक संग अहाँ सब के बतेलहुँ ।

राजा आओर सब दरबारी गोनू झा के बुद्धि पर दंग छलाह । ओतहि हजमा के कठोर दण्ड भेटल । संगहि गोनू झा के काफी इनाम भेटलैन्ह ।

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