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सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

छोट - छोट बात - जितमोहन झा (जितू)

अपन सबहक़ जीवन इश्वर के देल एक सर्वश्रेष्ठ उपहार अछि ! अई जीवन रूपी उद्यान क सुगंध सs परिपूर्ण बनाबई हेतु आर खुद क संतुष्ट राखै के लेल किछ बात ध्यान म राखब अति आवश्यक अछि ! अगर हम सब इ बात क सदैव ध्यान म राखी त निश्चित रूप स हम सबतरह सs आत्मिक शांति के सुख प्राप्त के सकब ! कखनो किनको स किछ प्राप्त करे के आशा नै करबाक चाही ! कियेकी इ जरुरी नै अछि की किनको पर करल गेल अपने के अपेक्षा हरदम पूरे हुवे ! आशा के विपरीत भेला पर यदि आहा के मन मए दुःख होई या त किनको दोसर स हम कुनू अपेक्षा करबे किये करब ?

हमेशा धीरज स काम लेबाक चाही, कियेकी रास्ता लम्बा जरुर होइत अछि मुदा अंतहीन नै ! कुनू कदम उठावे स पहिने भली भाति सोइच - विचैर लेबाक चाही

क्रोध क अपन वश म राखी कियेकी क्रोध मुर्खता स आरंभ आर पश्चाताप पर समाप्त होइत अछि !

सदैव याद राखी की "मधुर वचन अछि औषधि आर कटू वचन अछि तीर" इ शब्द क ध्यान म रैख क बाजी !

शेक्सपियर कह्लाखिन रहे " संक्षेप बुद्धिमत्ता के आत्मा होइत अछि ! आवश्यकता स अधिक बात किनको सुने हेतु बाध्य नै कारियोंन ! कहल गेल अछि वार्तालाप जतेक लम्बा होइत अछि ओकर प्रभाव ओतेके कम होइत अछि !
अपन प्रशंसा करे के भूल नै करी ! आई स आहा दोसर पर प्रभाव नै डेल सकब, सामना बाला क खुद पता चले दीयोंन की आहा एहेंन सीधा सरल व्यक्तित्व कतेक गुण स परी पूर्ण छी ! हुनका आहाके बरे म खुद अनुमान लगबे दीयोंन !
परनिंदा, आलोचना नै करी, दोसर के दोष निकाले के पाछा नै रही ! इ सब आदत उन्नति आर सफलता म बाधक सिद्ध होइत अछि !

इष्या आदमी कs ओही तरह खोखला बनबैत अछि जय तरह लकड़ी क दीमक ! इ भावना नै हमरा प्रसन्नता देत अछि नै दोसर कए ! हमरा सब क दोसर के सुख म सुखी, आर दोसर के दुःख मए दुखी होबक चाही !
प्रेम जीवन के सब कठिनाई आर समस्या क आत्मसार करैत अछि ! सदैव प्रेम के भावना रख्बाक चाही !
हमेशा आत्मविश्वासी रही, आत्मविश्वास जीवन के हर क्षेत्र म सफलता के ले जरुरी अछि ! जखन धन , ज्ञान , साथ नै दै छई तखन आत्मविश्वास काज आबे य !
दोसर के हित म अपन हित देखल करू , किनको दोसर के दुःख म अपन सुख के त्याग बहुत संतोष दै छई ! इ सच्ची सेवा कह्लाबे य ! दोसर के सेवा करबाक चाही किये की हर मनुष्य म इश्वर विधमान रहे छथिन ! किन्कारो आंसू पोछब मुसीवत म सहायता करब इश्वर के प्रार्थना के तुल्य होई छई !

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ज़िम्मेदारी - जितमोहन झा (जितू)

किछ महानुभाव अपन ज़िम्मेदारी कए बोझ समझेत छैथ आर किछ महानुभाव ओकरा अपन जीवन के उद्देश्य अपन कर्म आर कर्तव्य ! आइठंम सवाल इ नै अछि की के की मानैत छैथ, सवाल इ अछि की एके बात के लेल इ अलग -अलग नजरिया किये ?

बोझ या जीवे के उद्देश्य - हर काज के साथ जिम्मेदारी जुरल अछि ! बिना जिम्मेदारी कs पूरा केना कुनू काज मs सफलता के उम्मीद बैमानी अछि ! आब इ आहा क सोच्बाक अछि की काज जिम्मेदारी स करबाक चाही या बोझ समझ कs ....

जना की हम ककरो चर्चा करे छी त हुनकर छवि ध्यान मs आइब जैत अछि ! उधारण स्वरुप कुनू बच्चा के चर्चा करला पर ओकर मासूमियत, ओकर शरारत, ओका भोलापन सब स्मरण भो जाय यs ! बात कुनू मित्र के करू त हुनकर सज्जनता, आचरण व्यवहार सब हमरा सब के ध्यान म आइब जैत अछि ! ओहिना जखन कुनू कामयाबी के बारे म कुनू कामयाब आदमी के बारे म हमसब चर्चा करेत छलो त पबे छी सब के पाछा हुनकर जिम्मेदारी के हाथ छैन ! जखन - जखन स्वतंत्रता के चर्चा चले य तs ओई मए जै क्रांतिकारी के नाम बच्चा - बच्चा के जुबान पर होई छैन ओ खाली अई लेल की ओसब जे जे जिम्मेदारी लेलैथ रहे ओकरा बखूबी समझल्खिंन आर पूरा तन - मन आर जान न्योछावर करे हेतुओ ओ अपन जिम्मेदारी स कखनो पीछा नै हटलेथ !

हम त इये कहब कुनू भी काज कs जिम्मेदारी स करे के प्रयाश करी ! चाहे काज पैघ हुवे या छोट जिम्मेदारी स करल गेल काज के मज़े किछ आर होई य ! जिम्मेदारी स काज करै वला मए विवेकशीलता, आत्मविश्वास आर सकारात्मक सोच के अमूल्य धरोहर हुनकर मार्ग प्रशस्त करैत खुद हुनकर काज म कामयाबी के मिसाल बैन क सदैव हुनकर मनोबल उंचा राखे छैन ! आई जतेक अविष्कार हमरा सब के बिच अछि ओकरो करे वला कियो सधारने इन्सान रहथिन ! आई नव - नव तकनीक नव - नव अविष्कार, हर क्षेत्र म दिनोदिन प्रगति के नव नव रास्ता तखने खुलल य जखन हमरा सब क अपन अपन जिम्मेदारी के समझक अहसास भेल अछि !

आई कियोभी चाहे आदमी, संस्था, समाज या देश अपन जिम्मेदारी कए समझे बिना किछ भी हासिल नै के सके छैथ ! एक छोट सन क देश जापान जकरा पूर्ण रूप स तहस - नहस करे म कुनू कसर बांकी नै राखल गेल, ओ फेर आर पहिने स कही ज्यादा उन्नत रूप मए विश्व भैर म अपन स्थान बनेना अछि ! कुन दम पर ? यकीनन अपन जिम्मेदारी स उद्देश्य समेझ कs ....

अहिलेल कहेछलो आहू अपन जिम्मेदारी पूरा करे म कुनू कसर बांकी नै राखी ! यदि अपने क इ बोझ महसूस हुवे त यकीनन आहाके ओकरा बारे म आगा किछ भी सोच्बाक व्येथ अछि ! आहा ओई काज क ओहिठाम छोइर क चैन के निंद ली इये आहा के लेल बेहतर हेत ! कियेकी जखन आहा अपन आचरण आर व्यवहार मए कुनू बदलाव नै लाबे चाहे छी त कम स कम अपन समय बर्बाद नै करू ! पुरातन काल मए कतेक लड़ाई भेल, जते जिम्मेदारी स काज करल गेल ओते हुनका सब क जीत मिललैन आर जते जिम्मेदारी ठीक ढंग स पूरा नै भेल ओई ठाम परिणाम मए मिललैन - हार

अपने कs माने परत यदि आदमी कुनू जिम्मेदारी अपन इच्छा स लैत छैथ त ओ हुनकर ताकत आर जीवन जीवे के उद्देश्य बैन जाय छैन ! मुदा यदि कुनू जुम्मेदारी ज़बरन लिए परे त ओ बोझ महसूस हुवे लागे य ! सवाल जिम्मेदारी के अहसास के अछि ! जकरा संक्षेप्त म कहल जाय त अपन हालत आर हालात के जिम्मेदारी यदि आहा स्वयं पर ली तखने अई मs सूधार हेत !!

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ईश्वर के दोसर रूप "माँ" - (आलेख)

माँ,

अई भावना कए शब्द मs बाँधब बहुत कठिन अछि ओ ईश्वर के बनेल एहेंन कृति छथिन जिनका ख़ुद ईश्वर अपन सब सs करीब महसूस करैत छैथ ! माँ ईश्वर के दोसर रूप केना छैथ ........

जखन (ईश्वर) भगवान माँ बनेल्खिंन

ईश्वर माँ के सृजन मs बहुत व्यस्त रहथिन ओही बिच एक देवदूत अवतरित भेल्खिंन आर ईश्वर सs कहाल्खिंन : अपने इ चीज के निर्माण पर बहुत समय नष्ट के रह्लो'य ! अई पर ईश्वर कहाल्खिंन 'देखई मs इ खाली हाड़ - मांस के कृति छथिन लेकिन हिनका पास एहेंन गोद हेतैन जे दुनिया भर के सकूंन सs भरल हेतैन , हिनका पास एहेंन आँचल हेतैन जकरा छाव मए किन्करो डर नै हेतैन , हिनका पास एहेंन ममता हेतैन जै सs सब छोट - मोट पीड़ा ख़त्म भो जेतैन ........

देवदूत कहाल्खिंन -: हे ईश्वर, अपने आराम करू एहेंन कृति के हमही निर्माण के दैछी ! ईश्वर कहाल्खिंन नै हम आराम नै के सकैत छलो आर इ आहा के बस के बात नै अछि ! हिनकर निर्माण हम ख़ुद कर्बैंन ! ओई जीवेत जागेत कृति के निर्माण जखन ईश्वर के लेल्खिंन तखन देवदूत हुनका परैख कए अपन प्रतिक्रिया देल्खिं -: इ बहुत काफी मुलायम छैथ ! ईश्वर कहाल्खिंन "इ काफी सख्त सेहो छथिन ! अपने कल्पना नै के सकैत छलोs एहो सहो सहो सहो कते किछ बर्दाश्त के सकैत छथिन !

इ सहनशक्ति के प्रतिकृति छैथ'त की वक्त आबे पर चंडी, कलिका, दुर्गा, सेहों बैन कs अवतरित हेथिन ! धरती पर हिनकर अनेक रूप देखई लय मिलत ! देवदूत अभिभूत भेल्खिंन ! अंत मए गाल पर हाथ फेर कए कहाल्खिंन अई ठाम त पैन टपैक रहलेंन य ! हम अपने सs कहने रही न की अपने हिनका मए काफी ज्यादा चीज जोइर रहलो'य ! अई पर इश्वर कहाल्खिंन इ पैन नै नोर छियेंन ......

एकर कुन काज ?

इ ख़ुशी, ममता, कष्ट, उदासी, सुख - दुःख सब के लेल माँ के भावनात्मक प्रतिक्रिया छियेंन !देवदूत कह्लाखिंन -: अपने महान छी ! अपने के बनेल इ कृति सर्वश्रेष्ठ अछि ! हम अपने के इ कृति माँ कए सत् - सत् प्रणाम करै छियेंन !


परिभाषा स परे छैथ माँ .....

माँ एक सुखद अनुभूति अछि ! ओ एक शीतल आवरण छैथ सच'म शब्द सs परे छैन माँ के परिभाषा !
माँ शब्द के अर्थ कए उपमा अथवा शब्द के सीमा मs बाँधब सम्भव नै अछि ! इ शब्द के गहराई, विशालता, कए परिभाषित करब सरल नै अछि कियेकी इ शब्द मs सम्पूर्ण ब्रह्मांड, सृष्टि के उत्पति के रहस्य समेल अछि ! माँ व्यक्ति के जीवन मs हुनकर प्रथम गुरु होई छथिन हुनका विभिन्न रूप - स्वरुप मs पूजल जै छैन कुनू मनुष्य अपन जीवन मs मातृ ऋण सए मुक्ति नै पैब सके छैथ ! अपन मिथिला संस्कृति मs जननी आर जन्मभूमि दुनु कए माँ के स्थान देल गेल अछि !

मनुष्य अपन भौतिक आवश्यकता के पूर्ति जन्मभूमि यानि धरती माँ सs ताए जीवनदायी आवश्यकता के पूर्ति जननी सs करैत छैथ माँ अनंत शक्ति के धारनी होई छथिन ! ताहि हेतु हुनका ईश्वरी शक्ति के प्रतिरूप मैंन'क ईश्वर के सद्र्श्य मानल गेल छैन ! माँ के करीब रैह'क हुनकर सेवा के'क हुनकर शुभवचन सs जे आनंद प्राप्त होइत अछि ओ अवर्णनीय अछि ! अपन देल गेल स्नेह के सागर के बदला माँ अपन बच्चा सs किछ नै चाहेत छथिन ! ओ हर हाल मs बच्चा के हित सोचे छथिन, तही हेतु हम अपन समस्त मिथिला वासी सs हाथ जोरी विनती करे चाहब की हुनका (माँ) अपन तरफ सs कुनू तरह के दुःख नै हुवे दीयोंन इ हमर सब के कर्तव्य होबाक चाही..

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नशा कs नै कहू... (सामाजिक आलेख)


मुझे पिने की शौक नहीं पिता हूँ गम भुलाने को ......

शिखर (गुटखा) पाउच के बिना खाना हजम नै होइत अछि ! तम्बाकू सs त दाँत सुरक्षित रहैत अछि ! इत्यादि अनेक तरहक गप अपने सब नशेरी मधपान करै वला आदमी के मुह सs दिन रैत सुनैत हेब ! इ सब तर्क ओ सब अपन नशा करै के पक्ष मs देत छला ! हम तs कहैत छलो वर्तमान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अपन देश के पहिल स्वास्थ्य मंत्री हेता जे इ समस्या कs गंभीर सs लेना छैथ, आर ओ नशा पर रोक लगबै के प्रयाश मs जुरल छैथ !

पता चलल जे सार्वजनिक रूप सs धुम्रपान पर रोक, फ़िल्म मs शराब या सिगरेट पिबै के दृश्य कs नै देखबे के घोसना ओ केने छैथ ! संगे इयो पता चलल की हुनकर इ बात के बिरोध देश के महानायक अमिताभ बच्चन केलखिन हुनकर कहब छैन यदि फ़िल्म मs अई तरहक दृश्य नै देखेल जेते तs फेर देवदास जेहेंन फ़िल्म कोना बैन सकत ? महानायक के मुख सs अई तरहक बात देश वासी के नै पसंद भेलैन ! अहि कहू न की अमिताभ बच्चन जी एहेंन नेक इन्सान भला समाज आर इंसानियत के दुश्मन कोना भो सकैत अछि फ़िल्म निर्देशक महेश भट्टो हुनकर सुर सs मिलेल्खिंन, इ कहल जाओ की बिना शराब के बोतल हाथ मे लेने अभिनेता गमगीन नै देखेल पर्थिन ? आय के युवावर्ग अभिनेता सब सs बहुत प्रभावित रहैत छैथ ! नाई के दुकान पर अपने देखने हेब सब युवा के मांग रहै छैन शाहरुक खान , धोनी जेहेंन केश आर अभिषेक बच्चन जेहेंन दाढ़ी बन्बै के ! कुनू फ़िल्म मs अभिनेता यदि कुनू नया कपड़ा पहनै छैथ त हर युवा के ओ पहिलुक पसंद बैन जाय य !

आब कहू जे धुम्रपान करैत फ़िल्म के दृश्य सs जनमानस पर बुरा असर पड़ते की नै ? कम सs कम इंसानियत के नाते जै समाज मs हम रहै छि ओकर ध्यान राखब हमर सबहक फर्ज अछि ! सरकार कs हर साल धुम्रपान सs होई बला मौत के आकरा निक जोक मालूम छैन तदुपरांत ओ प्रतिबन्ध नै लगबैत छैथ, अहि कहू न खाली वैधानिक चेतावनी भर लिख देना सs किछ होई बला अछि ? यदि सरकार धुम्रपान पर रोक लगबैत छैथ तs हुनका भारी राजस्व के नुकसान हेतैन मुदा ओ इ नै सोचैत छैथ की यदि देश के नागरिक धुम्रपान ग्रसित नै हेता त हुनकर स्वस्थ्य दिमाग के उपयोग कतो नै कतो देश के हित मs उपयोगी हेतैन ! एक बात तs देखलो य की लत परे के बाद आदमी खुद ओई चीज कs बुरा मानैत छैथ बहुतो के मुंह सs सुनना छी....

अरे यार वाकई में नशा बहुत बुरी चीज हैं, पर अब क्या करू छूटती ही नहीं !

संक्षिप्त मs हम इ कहे चाहे छि की जे चीज तन मन आर धन हर तरह सs हमरा सब कs लुटी रहल अछि खाली अपने सब नै अपने सबहक़ परिजनों जै सs परेशान छैथ ओकरा सs भला हमरा सब'क कुन लाभ मीलत ? तही हेतु अपन खातिर नै सही घर - परिवार आर अपन बच्चा के खातिर इ जहर कs नै कहू आर खुश हाल जिन्दजी कs हाँ कहू !

हर फिक्र कs धुवा मs उराबई के बदला हवा मs उड़े बला धुआ के फिक्र करू .....

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