Ads by: Mithila Vaani

रविवार, 26 मई 2013

चलू देरेसँ सही, मुदा मिथिलाक लोक ई तँ मानै छथि जे नागार्जुन गलती केने छला। हुनका तँ आब सजाय नञि देल जा सकैत अछि। ओना नव साहित्यकार आ लेखक लोकनिकेँ एहिसँ किछु सन्देश लेबक चाही। आब आबी मुल बातपर हमरा जनतबे जहिया यात्री जीकेँ मैथिलीमे साहित्य अकादमी पुरस्कार देल गेल तहियो राजनीती भेल छल, जहिया उषा किरण खानकेँ भेटल तहिया सेहो आ एहि बेर शेफालिका वर्माकेँ भेटल ताहिमे सेहो राजनीती भेल। ई लुट सकै सो लुटि वला बात मैथिली साहित्यमे कोनो नव नञि अछि। तखन सुकान्ता सोम सन वरिष्ठ पत्रकार एहि बातपर बतकुच्चनि कऽ की कहऽ चाहै छथि???????


  चलू देरेसँ सही, मुदा मिथिलाक लोक ई तँ मानै छथि जे नागार्जुन गलती केने  छला। हुनका तँ आब सजाय नञि देल जा सकैत अछि। ओना नव साहित्यकार आ लेखक लोकनिकेँ एहिसँ किछु सन्देश लेबक चाही।
आब आबी मुल बातपर हमरा जनतबे जहिया यात्री जीकेँ मैथिलीमे साहित्य अकादमी पुरस्कार देल गेल तहियो राजनीती भेल छल, जहिया उषा किरण खानकेँ भेटल तहिया सेहो आ एहि बेर शेफालिका वर्माकेँ भेटल ताहिमे सेहो राजनीती भेल। ई लुट सकै सो लुटि वला बात मैथिली साहित्यमे कोनो नव नञि अछि। तखन सुकान्ता सोम सन वरिष्ठ पत्रकार एहि बातपर बतकुच्चनि कऽ की कहऽ चाहै छथि???????

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शुक्रवार, 24 मई 2013

आदरनीय सुकान्त सोमजी... मिथिला दर्शनक अंकमे ‘लुटि सकय सो लुटि’ वला लेख पढ़लौ। पढ़बाक क्रममे किछु बात सोचक लेल विवश भऽ गेल रही जे आइ अपनेक समक्ष राखि रहल छी। अपने एहि लेखमे साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करबा लेल भऽ रहल राजनीतिपर लिखलौ अछि, मुदा एहि बातक उल्लेख नञि केलौ जे हिन्दीक वरिष्ठ साहित्यकार हेबाक बाद नार्गाजुनकेँ मैथिलीमे साहित्य अकादमी पुरस्कार कोनो भेटल? मैथिलीके ँ बारि देनिहार साहित्यकार फेरो मैथिलीमे कियक लिखलनि। की मात्र पुरस्कार प्राप्त करबा लेल। हमरा तँ जेना बुझाइत अछि जे पोथी लिखबाक पहिनेसँ ओ आश्वसथ छला जे हुनका पुरस्कार अवश्य भेटतनि। जे भेटबो केलनि। की ओहि समय ई पुरस्कार मात्र किछु खास लोकक कारणे ँ हुनका नञि भेटल छलनि??? एहिमे कोनो सन्देहक बात नञि जे यात्रीजी मैथिली भाषाक विकास लेल बड़ किछु केलनि, मुदा प्रश्न उठैत अछि जे नागार्जुन मैथिली लेल की केलनि। जखन हुनका हिन्दी सनक अथाह समुद्र वला साहित्य जगतमे थाह नञि भेटलनि तँ आबि गेला मैथिली साहित्यमे डूबकुनिञा काटऽ लेल। हिन्दीमे प्रसिद्धि हेबाक आ हुनक कद बड़ बेसी रहबाक कारणे ँ हुनक सम्मान ओहि समयक प्रत्येक मैथिली साहित्याकर लोकनि करै छला। कतौ ने कतौ ईहो एक गोट कारण छल जे हुनका ई पुरस्कार देल गेलनि। नञि तँ जे आदमी आई धरि मैथिलीक तुलनामे हिन्दीक बेसी सेवा केने होथु, हुनका साहित्य अकादमीक पुरस्कार आसानीसँ मैथिलीमे भेट जाइत छनि। अहांक कड़ूगर सच भने वामपन्थी सभकेँ नीक लागल होनि, मुदा सच की अछि वा झुठ की ई सभ जानैत छथि। जनता आब एतेक बुरबक नञि छथि। अंहाक पदवी भेट गेल आ अंहाक किछु केलौ से बड़ नीक आन क्यौ करय तँ कष्ट भऽ रहल अछि। से कियक???? कनी एहि बातक जवाब देबाक कष्ठ करी। राजनीति ओहो दिन भेल छल आ राजनीति आइयो भऽ रहल अछि। अहांक लेख पढ़बाक बाद एक गोट बात मोन पड़ि रहल अछि ‘कृष्ठ करथि तँ रासलीला, हम करी तँ कैरेक्टर ढ़ीला’। वाह यौ सुकान्त जी बढ़िया पत्रकारिता कऽ रहल छी। आब तँ एहि तरहक नाटक बन्न करू। रोशन कुमार ‘मैथिल’


  आदरनीय सुकान्त सोमजी...

 मिथिला दर्शनक अंकमे ‘लुटि सकय सो लुटि’ वला लेख पढ़लौ। पढ़बाक क्रममे किछु बात सोचक लेल विवश भऽ गेल रही जे आइ अपनेक समक्ष राखि रहल छी। अपने एहि लेखमे साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करबा लेल भऽ रहल राजनीतिपर लिखलौ अछि, मुदा एहि बातक उल्लेख नञि केलौ जे हिन्दीक वरिष्ठ साहित्यकार हेबाक बाद नार्गाजुनकेँ मैथिलीमे साहित्य अकादमी पुरस्कार कोनो भेटल? मैथिलीके ँ  बारि देनिहार साहित्यकार फेरो मैथिलीमे कियक लिखलनि। की मात्र पुरस्कार प्राप्त करबा लेल। हमरा तँ जेना बुझाइत अछि जे पोथी लिखबाक पहिनेसँ ओ आश्वसथ छला जे हुनका पुरस्कार अवश्य भेटतनि। जे भेटबो केलनि। की ओहि समय ई पुरस्कार मात्र किछु खास लोकक कारणे ँ हुनका नञि भेटल छलनि???  एहिमे कोनो सन्देहक बात नञि जे यात्रीजी मैथिली भाषाक विकास लेल बड़ किछु केलनि, मुदा प्रश्न उठैत अछि जे नागार्जुन मैथिली लेल की केलनि। जखन हुनका हिन्दी सनक अथाह समुद्र वला साहित्य जगतमे थाह नञि भेटलनि तँ आबि गेला मैथिली साहित्यमे डूबकुनिञा काटऽ लेल। हिन्दीमे प्रसिद्धि हेबाक आ हुनक कद बड़ बेसी रहबाक कारणे ँ हुनक सम्मान ओहि समयक प्रत्येक मैथिली साहित्याकर लोकनि करै छला। कतौ ने कतौ ईहो एक गोट कारण छल जे हुनका ई पुरस्कार देल गेलनि। नञि तँ जे आदमी आई धरि मैथिलीक तुलनामे हिन्दीक बेसी सेवा केने होथु, हुनका साहित्य अकादमीक पुरस्कार आसानीसँ मैथिलीमे भेट जाइत छनि।
अहांक कड़ूगर सच भने वामपन्थी सभकेँ नीक लागल होनि, मुदा सच की अछि वा झुठ की ई सभ जानैत छथि। जनता आब एतेक बुरबक नञि छथि। अंहाक पदवी भेट गेल आ अंहाक किछु केलौ से बड़ नीक आन क्यौ करय तँ कष्ट भऽ रहल अछि। से कियक???? कनी एहि बातक जवाब देबाक कष्ठ करी। राजनीति ओहो दिन भेल छल आ राजनीति आइयो भऽ रहल अछि। अहांक लेख पढ़बाक बाद एक गोट बात मोन पड़ि रहल अछि ‘कृष्ठ करथि तँ रासलीला, हम करी तँ कैरेक्टर ढ़ीला’। वाह यौ सुकान्त जी बढ़िया पत्रकारिता कऽ रहल छी। आब तँ एहि तरहक नाटक बन्न करू।

रोशन कुमार ‘मैथिल’

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रविवार, 19 मई 2013

जँ अपने लोकनि आइ जानकी नवमी मनेलौ अछि वा अहाँक लग पासमे मनाओल गेल अछि तँ कृप्या एहि सन्दर्भमे जानकारी अवश्य दी जे कोन-कोन ठामा आइ जानकारी मनाओल गेल। फोटो उपल्बध करा सकी तँ अपने लोकनिक आभारी रहब। नीचा देल मेल पतापर जानकारी पठाबी वा 08292560971 पर फोन करी। mithilaawazdarbhanga@gmail.com pathakmaithil@gmail.co


  जँ अपने लोकनि आइ जानकी नवमी मनेलौ अछि वा अहाँक लग पासमे मनाओल गेल अछि तँ कृप्या एहि सन्दर्भमे जानकारी अवश्य दी जे कोन-कोन ठामा आइ जानकारी मनाओल गेल। फोटो उपल्बध करा सकी तँ अपने लोकनिक आभारी रहब। नीचा देल मेल पतापर जानकारी पठाबी वा 08292560971 पर फोन करी।

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