बुधवार, 21 सितंबर 2011

दहेज मुक्ति के लेल मिथिलांचल स शुरू भेल नव् प्रयास.

भारतीय संस्कृति के प्राचीन जनपद में स एक राजा जनक के नगरी मिथिलाक अतीत जतेक स्वर्णिम छल वर्तमान उतवे विवर्ण आइछ। देवभाषा संस्कृत के पीठस्थली मिथिलांचल में एक स बढ़ी क एक संस्कृत के विद्वान भेला जिनकर विद्वता भारतीय इतिहास के धरोहर आइछ। उपनिषद के रचयिता मुनि याज्ञवल्क्य, गौतम, कनाद, कपिल, कौशिक, वाचस्पति, महामह गोकुल वाचस्पति, विद्यापति, मंडन मिश्र, अयाची मिश्र, सन नाम इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में रवि के प्रखर तेज के समान आलोकित आइछ। चंद्रा झा मैथिली में रामायण के रचना केलि। हिन्दू संस्कृति के संस्थापक आदिगुरु शंकराचार्य के सेहो मिथिला में मंडन मिश्र के विद्वान पत्नी भारती स पराजित होव परलैन। कहल जाइत आइछ ओई समय मिथिला में पनिहारिन सब स संस्कृत में वार्तालाप सुनी शंकराचार्य आश्चर्यचकित भेला।
कालांतर में हिन्दी व्याकरण के रचयिता पाणिनी , जयमंत मिश्र, महामहोपाध्याय मुकुन्द झा “ बक्शी” मदन मोहन उपाध्याय, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह “दिनकर”, बैद्यनाथ मिश्र “यात्री” अर्थात नागार्जुन, हरिमोहन झा, काशीकान्त मधुप, कालीकांत झा, फणीश्वर नाथ रेणु, बाबू गंगानाथ झा, डॉक्टर अमरनाथ झा, बुद्धिधारी सिंह दिनकर, पंडित जयकान्त झा, डॉक्टर सुभद्र झा, सन उच्च कोटि के विद्वान और साहित्यिक व्यक्तित्वों के चलते मिथिलांचलक ख्याति रहे। अइयो राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त कतिपय लेखक, पत्रकार, कवि मिथिलांचल स संबन्धित छैथ। मशहूर नवगीतकार डॉक्टर बुद्धिनाथ मिश्रा, कवयित्री अनामिका सहित समाचार चैनल तथा अखबार में चर्चित पत्रकारक बड़ाका समूह ई क्षेत्र स संबंधित छैथ। मगर एकर फायदा ई क्षेत्र के नहीं भेट पावी रहल आइछ। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनवरत उपेक्षा और स्थानीय लोकक विकाशविमुख मानसिकता के चलते कहियो देश का गौरव रहल इ क्षेत्र आई सहायता के भीख पर आश्रित आइछ। बढ़ीग्रस्त क्षेत्र होव के कारण प्रतिवर्ष इ क्षेत्र कोशी, गंडक, गंगा आदि नदि के प्रकोप झेलैत आइछ। ऊपर स कर्मकांड के बोझ स दबल इ क्षेत्र चहियो क भी विकास के नव अवधारणा के अपनेवा में सफल नै भ पवी रहल आइछ। जे लोक शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक रूप स सक्षम छैथ सब आत्मकेंद्रित अधिक छैथ, तै हेतु हुनकर योगदान ई क्षेत्र के विकास में नगण्य छैन। मिथिलांचल स जे कोनो प्रबुद्धजन बाहर गेला ओ कहियो घुमियो क ई क्षेत्र के विकास के तरफ ध्यान नहीं देलखिन। पूरा देश और विश्व में मैथिल मिल जेता मगर अपन मातृभूमि के विकासक हुनका कनिको चिंता नई छैन।
एहन में सामाजिक आंदोलन के जरूरत के देखैत स्थानीय और प्रवासी शिक्षित एवं आधुनिक विचार के एक युवा समूह नव तरीका स मिथिलाञ्चल में अपन उपस्थिती दर्ज़ करेला। दहेज मुक्त मिथला के बैनर के निचा संगठित भ इ युवक सब अपन इ मुहिम का नाम देलखिन “ दहेज मुक्त मिथिला”।
राचन:-
पवन झा”अग्निवाण”

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