रविवार, 30 मार्च 2014

कथा गोष्ठमे आबि रहल आरजकता

कथा गोष्ठमे आबि रहल आरजकता

विगत किछ कथा गोष्ठी सगर राति दीप जरयमे किछु तथाकथित साहित्यकार लोकनि आरजकता पसारबाक प्रयास कऽ रहल छथि। हिनका लोकनिक कहब छनि जे ओ लोकनि जे करै छथि वैह ता सत्त अछि मुदा हमरा विचार अछि कोनो नियम वा विवादक फरछौट सर्व सम्मतिसँ कयल जेबाक चाही। हिनका लोकनि द्वार कयल गेल किछु कुकृत्य देखल जाउ...

1* अपने स्वयं कथा गोष्ठिमे कथाा पाठ करबाक बाद ओेंघेता मुदा जँ कोनो आन सहित्यकारसँ सेहो सुता गेलनि तँ ओकर सातो पुश्तकेँ एक कऽ देता।
2* ककरो कथा क करोसँ पढा कोनो पत्रिकामे अपना नामसँ छपेता।
3* कथाक समीक्षा केनिहार समीक्षाकारपर सेहो समीक्षा करेता।
4* सरस्वतीक मापन ई लोकनि जातिगत आधारितपर करता।
5* एखन धरि कोनो पुरस्कार नञि भेटलनि तै ँ सामान्तर पुरस्कारक आरम्भ करेलनि।
6* सुनबामे आबि रहल अछि जे ई लोकनि आब समान्तर कथा गोष्ठीक आयोजन कऽ रहल छथि, जाहिमे किछु जाति विशेषक वचर्श्व रहत तकर पहिनेसँ घोषणा कयल गेल छनि।

अन्तमे हम यैह कहब एहि दलक किछु बुड़ि लेल कथाकारसँ माँ मैथिलीक रक्षा करथ रौना माइ....

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