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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

शराबी नैन स पिया दैतो..

भोरे-भोरे उठी क शराब पीनाय कैलो हँन चालु
प्रभाकर जी आहा कहु जे इ पैग में कते पैन डालु

आहा ठंडा पैन स अपन आँखी धो क लाली त हटाबु
फ्रिज में स नबका बैगपेपर (दारू) के बोतल त पकराबु

रोज राति क सपना में हम ठेका पर जय छी
सबटा खेत और घरारी भरना लगा दैत छी

खेत और घरारी कखनो हम भरना नहीं लगैतो
आहा जे एक बेर अपन शराबी नैन स पिया दैतो

मानलो हम आहा के बहुत दूख-दर्द देलो
मुदा आहु त हमरा स पूरा प्रेम नहीं केलो

मानलो की आहा सुंदर-सुशिल हमर कनिया भेलो
मुदा आहा स ज्यदा हम दारू स प्रेम केलो

आब नहीं सताबु आबी जाऊ अपन घरे में रहब
भले दारू छोरी , दोस्त छोरी आहा के मारी सहब

रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)

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गजल


कर जोडै छी सरकार आब रह' दियौ।
कते करब भ्रष्टाचार आब रह' दियौ।

'टू जी', चारा, खान घोटाला, किछो नै छूटल,
भरि गेल अछि 'तिहाड' आब रह' दियौ।

मुखिया बनै सँ पहिने चलै छलौं पैरे,
कोना चढ' लगलौं कार आब रह' दियौ।

कण्ठ मोकि जनताक कते राज करब,
जनता नै छै यौ लाचार आब रह' दियौ।

कोना फूसि बाजि अहाँ "ओम" केँ ठकि लै छी,
केलियै लाजक संहार आब रह' दियौ।
----------- वर्ण १५ ----------------

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अपन गाम

गाम अपन गाम अछि
पुरखा केर नाम अच्छी
कर्मभूमि माटी थिक
जनकिक धाम अच्छी //

गाम अपन गाम अछि
पाहून सन राम अछि
सीता जी बेटी छथी
सबहक़ प्रणाम अछि //

गाम अपन गाम अछि
भैया बलराम अछि
माधब केर राधा
प्रेम हिनकर दाम अच्छी //

गाम अपन गाम अछि
घरमे आराम अछि
गौरिकेर शंकर छथि
उगना बेदाम अछि //

गाम अपन गाम अछि
आम संग लातम अछि
लीची आर केराक संग
पण आ मखान अछि //

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