मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

आइ काल्हि फेसबुकपर किछु मैथिल लोक द्वारा हिन्दीमे बहुत रास लेख रचना लिखल जा रहल अछि। एहिमे कोनो सन्देहक गप नञि जे हिन्दी देशक राष्ट्रभाषा अछि। ओना ईहो शोलह आना सच बात अछि जे आइ धरि जे जे राज्य वा प्रान्त हिन्दी भाषाकेँ अपनेलक ओकर सभ्यता आ संस्कृति विलुप्तक बाटपर ठाढ़ अछि। दोसर जखन नार्गाजुन सनक वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकारकेँ हिन्दी किछु नञि देलक तखन हमर अंहाक बाते की। ओना एहि तरहक पोस्ट जखन जखन देखै छी तँ एक गोट फ करा अवश्य मोन पड़ि जाइत अछि जे ‘कुकुड़ मारे तिरपित’ ।


  आइ काल्हि फेसबुकपर किछु मैथिल लोक द्वारा हिन्दीमे बहुत रास लेख रचना लिखल जा रहल अछि। एहिमे कोनो सन्देहक गप नञि जे हिन्दी देशक राष्ट्रभाषा अछि। ओना ईहो शोलह आना सच बात अछि जे आइ धरि जे जे राज्य वा प्रान्त हिन्दी भाषाकेँ अपनेलक ओकर सभ्यता आ संस्कृति विलुप्तक बाटपर ठाढ़ अछि। दोसर जखन नार्गाजुन सनक वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकारकेँ हिन्दी किछु नञि देलक तखन हमर अंहाक बाते की।

ओना एहि तरहक पोस्ट जखन जखन देखै छी तँ एक गोट फ करा अवश्य मोन पड़ि जाइत अछि जे ‘कुकुड़ मारे तिरपित’ ।

1 टिप्पणियाँ:

Dr. Dhanakar Thakur 16 अप्रैल 2013 को 4:28 pm  

हिन्दी भारतक राजभाषा अछि राष्ट्रभाषा नहीं- कहल जाय त देशक सब भाषा राष्ट्रभाषा अछि. मैथिल के हिन्दी में लेखन कोनो नब बात नहि, नहीये ई खराब लेकिन ओ हिन्दी पेजपर हो. हमहू दूनूमें लिखैत छि लेकिन मैथिलीके हेय मानिकय नहि. जबात मिथिला राज्य नहि होयत जकर बहुसख्या अपनाके मैथिलीभाषी बुझय आ जनगणना क आंकड़ा तेहेन हो, ई समस्या रहत जाकर कारण, दरभंगा राजक १८७८ क फरमान आ बिहारक राजभाषा हिन्दी आ उर्दू होयब अछि- एही स मिथिलाके त्राण भेटब कठिन अछि असम्भव नहि ओना ई टखने होयत जखन भारतक राष्ट्रभाषा सेहो संकृत निष्ठ हिन्दी वा अति सरल संस्कृत बनि जाय जे देशमे बिना सुच्चा राष्ट्रवादक संभव नहि.

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