बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

गाबैत रही सदिखन एकेटा गुणगान,

गाबैत रही सदिखन एकेटा गुणगान,
हमर पुरखा बड महान,हमर पुरखा बड महान,हमर पुरखा बड महान......
पुरखा छला एहन ओहन, हम छि निठला,
ओ अरजला बाबन बीघा, भले हम बेलला,
पान तमाकुल भेटिया ने, बचई छि खेत खर्हियान,
हुनके हम बंसज छि, नामी छल हमर खानदान,
हमर पुरखा बड महान......३
खान पान हुनकर छल, तरुवा बगारुवा,
तिमन तरकारी छल, अरुवा खम्हरुवा,
हम खाई छि चिकन अंडा, कहियो काल मदिरा-पान,
लोक भले किछो कहै, हमर अईछ अपन शान,
हमर पुरखा बड महान.....३
धोती आ कुरता पर, बंडी आ दोप्ता छल,
माथ जखन पाग चढ़ाई, भेटजाई दुगुना बल,
हम लुंगी धारी छि, आ गपि नै हमर समान,
हमरा स लगाब त, हरि लेब हम आहाक प्राण,
हमर पुरखा बड महान......३
रचना:-
पंकज झा

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