मंगलवार, 10 अप्रैल 2012


गजल@प्रभात राय भट्ट

            गजल

रिमझिम सावन बरसलै मोर अंगना
देखू सखी अंगना चलीएलै मोर सजना


अंगना में नाचाब हम खनका के कंगना 
जन्म जन्मक पियास मेटलै मोर सजना


देखलौ मधुमास हम मनोरम सपना 
अहाँ विनु करेज धरकलै मोर सजना 


बैशाख जेठक अग्न सँ जरल छल मोन 
अंग अंग में जलन उठलै मोर सजना 


अहाँक छुवन सँ दिल में उठल जलन 
मिलन लेल दिल तरसलै मोर सजना 
वर्ण:-१६ 
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

  © Mithila Vaani. All rights reserved. Blog Design By: Chandan jha "Radhe" Jitmohan Jha (Jitu)

Back to TOP