बुधवार, 9 मई 2012

>>>गजल<<<

अहाँक गहिर झील सन आइंख क' जौं हम नील कमल कैह दी'
सौंस नगर जैर क' मैर जैत जौं एही पर कोनो गजल कैह दी'
...
अहाँ चली जखन थामि-थामि क' हजारो नजेर अहिंक तकै अछि
अहाँक संगमरमर सन देह क' किये नै ताजमहल कैह दी'

इठला- इठला क' छुवी-छुवी जाई अहाँक बदन पवन पुरिवा
आई अहाँ लेल पुरिवा क' हम कियेक नै पवन चंचल कैह दी'

कमला- कोशी क' देखू धार बहे अछि अहींक चलब अनुकूले त'
देखू किये नै हम सबटा धारो के अहिंक नाम सौं बहल कैह दी'

मेघो बरसय अछि अहींक केशक करि घटा सौं पूछीये -पूछीये
कहू किएक हम नै अहाँक केशो क' घन करिया बादल कैह दी'

सरल वर्णिक बहर वर्ण --२५

>>स्श्नेह रूबी झा <<

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