शुक्रवार, 11 नवंबर 2011


दहेज बनल हमर अभिशाप@प्रभात राय भट्ट

सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२

नन्हका छौराछेबारी बनल बाप
दहेज बनल हमर अभिशाप
बड़का बटुआ बाबु सियौनेछी
हमर जिया किये तर्सौनेछी
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

अगुआ घटक अबिते बाबु
भोजैतछि अहां सभ बेकाबू 
काका मंगैय चैर पचास
बाबु करैय पुरे पांचक आस
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

घटक घुईर जाईत कहैय रहू कुमार
दहेज़ कारन जरल हमर कपार
केस पाकल दाढ़ी पाकल
चोट्क्ल हमर दुनु  गाल
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

आब दाम कियो नै लगाबैय
बाबु देख अहांक झखरल माल
बाप बनल अछि पैकारी
बेट्टा बनल अछि मालजाल
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

सगरो लागल अछि देखू
दहेज़ कुप्रथाक रोजगारी
बेट्टा भलही रही जाय कुमार
बापके लागल दहेजक बीमारी
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

ऊमर बितल जाईय हमर
बुढ़ारीमें कोना करब घ्यूढारी
मोन करेय हमहू जईतौ कोहबर
बाबु छोडू इ दहेजक रोजगारी
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

 रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

1 टिप्पणियाँ:

kumar 11 नवंबर 2011 को 12:33 pm  

Bahut Nik Rachna....Prabhat ji ke Dhanyawad...

Kumar Kali Bhushan
Mumbai - Keoti

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