मंगलवार, 15 नवंबर 2011

गजल


ओ हमरा बिसरि गेल जे गाबैत रहै छल हमर गीत।
शहरक हवा लागि गेलै आब भेल शहरी हमर मीत।

मोनक कोनटा मे नुकेलक नेनपनक सभ क्रीडा-खेल,
खाइ छलै संगे पटुआ, ओकरा लागै मधुर हमर तीत।

छल जुटल जकरा संग हृदय हमर, रहितो काया दू,
हमरा हरबैथ आब, अपमान बूझैथ ओ हमर जीत।

दोस्तीक सपथ खाइत नै छलै अघाइत ओ हमरा संग,
भसकेलक घर दोस्तीक, द्वेषक बनि गेल हमर भीत।

मीत घुरि आबू, एखनहुँ "ओम"क हृदय मे अहींक वास,
फेर बहाबियो धार दोस्तीक, जे छल अहाँक हमर रीत।
-------------------- वर्ण २२ ---------------------
(हमर नेनपनक मीत केँ समर्पित, जे हमरा बिसरि गेला)

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