मंगलवार, 15 नवंबर 2011

नाक हमर नकेल हुनकर - अजय ठाकुर (मोहन जी)

तेल हुनकर फुलेल हुनकर

हुनकर महफिल में खेल हुनकर

दूर स जे देख रहल छी गुलदस्ता

दरशल तालमेल हुनकर

चाहे ओ ओ पाले या शिकार करथि

हुनकर बगरा गुलेल हुनकर

ऐ तरहक तालमेल हुनकर

की करू बंधी गैलो प्यार में

नाक हमर नकेल हुनकर


रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

  © Mithila Vaani. All rights reserved. Blog Design By: Chandan jha "Radhe" Jitmohan Jha (Jitu)

Back to TOP